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रविवार, 26 दिसंबर 2010

"अमन का पैगाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

♥ मेरी 800वीं पोस्ट ♥
दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!

आदमी हँसकर मिले इनसान से,
सीख लो यह सीख वेद-कुरान से,
वाहेगुरू का भी यही उपदेश है,
बाईबिल में प्यार का सन्देश है,

दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!

चार दिन की जिन्दगी, बाकी अंधेरी रात है,
किसलिए फिर दुश्मनी की बात है,
शूल की गोदी में पलते फूल हैं,
बैर के अंकुर उगाना पेट में निर्मूल हैं,

दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!

खुद जिएँ, औरों को जीना हम सिखाएँ,
इस धरा को स्वर्ग जैसा हम सजाएँ,
जिन्दगी और मौत का मालिक खुदा ,
कर रहा क्यों खुद को अपनों से जुदा,

दे रहा है अमन का पैगाम भारत!
अब नहीं होगा हमारा देश आरत!!

14 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी देश भक्ति कविता..... प्रेरित कर गई...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही अच्छा प्रयास. आज मुझे बहुत ख़ुशी हुई? धन्यवाद् .

    उत्तर देंहटाएं
  3. अब नहीं हो हमारा देश आरत ...
    प्रार्थना तो यही है ...
    शुभ हो !

    उत्तर देंहटाएं
  4. khoobsurat deskbhakti geet guru ji...
    lekin maaf kariyega...aarat ka matlab samajh nahi aaya...

    उत्तर देंहटाएं
  5. 800 वीं पोस्ट की बधाई ...

    बहुत सार्थक और सुन्दर अमन का पैगाम

    उत्तर देंहटाएं
  6. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 28 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. देशभक्ति की बहुत ही उम्दा प्रस्तुति, आपका आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  8. .

    खुद जिएँ, औरों को जीना हम सिखाएँ,
    इस धरा को स्वर्ग जैसा हम सजाएँ...

    बेहतरीन अभिव्यक्ति !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  9. सबसे पहले तो 800वीं पोस्ट के लिये हार्दिक बधाई।
    बहुत ही सुन्दर अमन का पैगाम दिया है……………आभार्।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों का संगम है इस अमन के पैगाम में ...बधाई इसी के साथ 800 पोस्‍ट पूरे होने के ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. चार दिन की जिन्दगी, बाकी अंधेरी रात है,
    किसलिए फिर दुश्मनी की बात है,
    शूल की गोदी में पलते फूल हैं,
    बैर के अंकुर उगाना पेट में निर्मूल हैं,


    बहुत सार्थक सन्देश ..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.आभार

    उत्तर देंहटाएं

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