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सोमवार, 20 दिसंबर 2010

"उग्रवाद का दमन करें हम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



आता है जब नया साल,
जगती नवआशाएँ मन में।
दे गया सीख जो गया साल,
विस्मृत कर देते जीवन में।


सुख का सूरज, दुख का कुहरा,
कुछ भी तो याद नहीं रहता।
नववर्ष मुबारक हो सबको,
जन गण मन का मानस कहता।


मज़हव की दीवार गिरायें,
आओ नये साल में हम।
दुनिया से आतंक मिटायें,
आओ नये साल में हम।।


जो कुछ अच्छा हुआ,
हमेशा उनको ही बस याद करें हम।
नमक छिड़कने में घावों पर,
क्यो पल-छिन बरबाद करें हम??


वर्ष पुरातन विदा करें हम,
हँसी खुशी से और जोश से।
नये वर्ष का अभिनन्दन कर,
काम करें हम सदा होश से।।


जननी-जन्मभूमि को अपनी,
जीवन भर ही नमन करें हम
साल पुराना हो या नूतन,
उग्रवाद का दमन करें हम।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. नवीन संभावनाएं जन्मे!
    सुन्दर गीत!

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर रचना। आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएॅं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. अति सुंदर रचना शास्त्री जी, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर सन्देश देती देशप्रेम के साथ एक नयी सुबह का आगाज़ करती तिरंगे मे लिपटी कविता बहुत ही पसन्द आयी।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी कविता में छुपी सद्भावनायें पूरी हों यही प्रार्थना है..

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी बात कही आपने ....सार्थक सन्देश !

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुख का सूरज, दुख का कुहरा,
    कुछ भी तो याद नहीं रहता।
    नववर्ष मुबारक हो सबको,
    जन गण मन का मानस कहता।

    Happy new year to you in Advance.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  8. जो कुछ अच्छा हुआ,
    हमेशा उनको ही बस याद करें हम।
    नमक छिड़कने में घावों पर,
    क्यो पल-छिन बरबाद करें हम??
    और आखिरी पँक्तियाँ बहुत सुन्दर प्रेरक हैं। अच्छा सदेश दिया आपने। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना ... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुंदर काव्य प्रस्तुति शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं

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