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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

"गांधी जी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज अपनी पौत्री प्राची की माँग पर 
गांधी जी पर 
मैंने यह बाल कविता लिखी है!
सारी दुनिया से हैं न्यारे!
बापू हमको लगते प्यारे!!

दीन-दुखी को गले लगाया,
शस्त्र अहिंसा का अपनाया,
भारत को आजाद कराया,
हिम्मत कभी नहीं थे हारे!
बापू हमको लगते प्यारे!!

सादा जीवन उच्च विचार,
उनके जीवन का आधार,
जग करता गांधी को प्यार,
तन पर खादी को हैं धारे!
बापू हमको लगते प्यारे!! 
कल प्राची को यह बाल गीत याद करके
विद्यालय में सुनाना है!

9 टिप्‍पणियां:

  1. कल बाबा का नाम रोशन होगा पोती के स्कूल में अभी से बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. कविता बहुत सुन्दर ..प्राची को शुभकामनायें ..

    उत्तर देंहटाएं

  3. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्राची को शुभकामनायें ..आपका लिखा गीत सुनाएगी तो तालियाँ भी खूब पायेगी.

    उत्तर देंहटाएं
  5. Prachi ne Gandhi ji par itni badhiya likhwa kar unhen amar kar diya..apko aur Prachi dono ko badhaaee..

    उत्तर देंहटाएं
  6. औरत की बदहाली और उसके तमाम कारणों को बयान करने के लिए एक टिप्पणी तो क्या, पूरा एक लेख भी नाकाफ़ी है। उसमें केवल सूक्ष्म संकेत ही आ पाते हैं। ये दोनों टिप्पणियां भी समस्या के दो अलग कोण पाठक के सामने रखती हैं।
    मैं बहन रेखा जी की टिप्पणी से सहमत हूं और मुझे उम्मीद है वे भी मेरे लेख की भावना और सुझाव से सहमत होंगी और उनके जैसी मेरी दूसरी बहनें भी।
    औरत सरापा मुहब्बत है। वह सबको मुहब्बत देती है और बदले में भी फ़क़त वही चाहती है जो कि वह देती है। क्या मर्द औरत को वह तक भी लौटाने में असमर्थ है जो कि वह औरत से हमेशा पाता आया है और भरपूर पाता आया है ?

    उत्तर देंहटाएं

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