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गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

"छोड़ देंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 ज्ञान का आशीष देना बन्द कर दो,
गीत हम अभिनव बनाना छोड़ देंगे।
 तुम सुरीली तान देना बन्द कर दो,
जिन्दगी का गान गाना छोड़ देंगे।।

धार बन कर अनवरत सी बह रही हो,
छंद को मधुरिम स्वरों में कह रही हो,
तुम रवानी को अगर कुछ मन्द कर दो,
हृदय में धड़कन सजाना छोड़ देंगे।
जिन्दगी का गान गाना छोड़ देंगे।।

चैन की बंशी बजेगी आपके ही साथ में,
जब तलक वीणा रहेगी माँ तुम्हारे हाथ में,
तुम निलय में मुस्कराना बन्द कर दो,
हम चमन में गुनगुनाना छोड़ देंगे।
जिन्दगी का गान गाना छोड़ देंगे।।

साध्य बनकर पूर्ण कर दो साधना, 
 वन्दना में कर रहा आराधना,
शब्द में मूरत दिखाना बन्द कर दो,
हम सुलेखा लेखनी को तोड़ देंगे।
जिन्दगी का गान गाना छोड़ देंगे।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा गीत । बहुत अच्छी भावना।

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  2. साधना की पूर्णता जीवनपर्यन्त चलती रहेगी।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सरस्वती जी ..से बेहद लगाव..माँ ज्ञान्दात्री... अगर वो हमें प्यार करना छोड़ दे तो हम भी सब छोड़ देंगे... इस लिए माँ सरस्वती से वंदना है कि वो अपने प्रेम अपने सुर और ज्ञान की गंगा सदा बहाती रहें... अपनी छत्रछाया देती रहे .. एक सुन्दर कविता...वंदना...शास्त्री जी आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर लयबद्ध गीत के माध्यम से वन्दना की है………………सुन्दर भाव्।

    उत्तर देंहटाएं

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