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गुरुवार, 10 मार्च 2011

"बालगीत-होली का मौसम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

रंग-गुलाल साथ में लाया।

होली का मौसम अब आया।

पिचकारी फिर से आई हैं,

बच्चों के मन को भाई हैं,
तन-मन में आनन्द समाया।
होली का मौसम अब आया।।
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गुझिया थाली में पसरी हैं,
पकवानों की महक भरी हैं,
मठरी ने मन को ललचाया।
होली का मौसम अब आया।।
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बरफी की है शान निराली,
भरी हुई है पूरी थाली,
अम्मा जी ने इसे बनाया।
होली का मौसम अब आया।।
मम्मी बोली पहले खाओ,
उसके बाद खेलने जाओ,
सूरज ने मुखड़ा चमकाया।
होली का मौसम अब आया।

13 टिप्‍पणियां:

  1. sir aabe holi dur hai .. lolz aabe se holi ka majja aa giya aapke post se... thx bouth aacha post hai aapka

    visit my blog plz
    Download free music
    Lyrics mantra

    उत्तर देंहटाएं
  2. देखकर मजा आ गया...अब तो आपके पास आना ही पड़ेगा... आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  3. गुजिया देख कर मुँह मे पानी आ गया लगता है भाभी जी के पास आना ही पडेगा गुजिया खाने
    सुन्दर बाल गीत बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाकयी होली का मौसम आ गया ..पकवान लाजवाब हैं

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह वाह यहां तो पूरी होली मन गयी है…………बहुत सुन्दर रचना और चित्रो ने मन मोह लिया।

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुन्दर बालकविता .....चित्र देखकर मुंह में पानी आ गया |

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुन्दर बालकविता .....चित्र देखकर मुंह में पानी आ गया |

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह-वाह, आनंद आ गया शास्त्री जी, रसीले व्यंजन चखकर !

    उत्तर देंहटाएं
  9. मूंह में पानी आ गया ! कविता पढ़ कर और तस्वीरें देख कर ! !

    उत्तर देंहटाएं
  10. चित्र और कविता अभी से ही होली का उत्साह बढ़ा रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  11. शास्त्री जी ने गीत रचाया ,मुहँ में पानी भर भर आया .
    होली का मौसम अब आया.

    उत्तर देंहटाएं

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