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गुरुवार, 17 मार्च 2011

"फिर से आई होली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 गाँव-गली और बाजारों में घूम रहीं हैं टोली।
हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।

कोई पीकर भंग नाचता, कोई सुरा चढ़ाए,
कोई राग-रागनी गाता, कोई ढोल बजाए,
मस्तक-चेहरों पर चित्रित है लाल-हरी रंगोली।
हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।

पश्चिम से पछुवा चलती है, पूरब से पुरवाई,
जाड़े का अब अन्त हो गया, रुत गर्मी की आई,
अम्बुआ की गदराई डालों पर, कोयल है बोली।
हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।
हरी बालियों ने गेहूँ की, धारा रूप सलोना,
दूर-दूर तक खेतों में, कंचन का बिछा बिछौना,
डर लगता है घन जब नभ में, करता आँखमिचौली।
हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।
जन-गण-मन की है अभिलाषा, रूठे मिलें गले से,
होली लेकर आती आशा, रिश्ते बनें भले से, 
कल तक जो थे अलग-थलग, वो बन जाएँ हमजोली।
हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. जन-गण-मन की है अभिलाषा, रूठे मिलें गले से,
    होली लेकर आती आशा, रिश्ते बनें भले से,
    कल तक जो थे अलग-थलग, वो बन जाएँ हमजोली।
    हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।


    होली पर बहुत सुन्दर और सार्थक गीत

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह होली की बयार बह चली है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. होली पर बहुत सुन्दर और सार्थक गीत|धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी , एक और बेहतरीन रचना के लिए धन्यवाद स्वीकारें ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. कल तक जो थे अलग-थलग, वो बन जाएँ हमजोली।
    हुल्लड़ और धमाल मचाने, फिर से आई होली।।
    बेहतरीन होली गीत !

    उत्तर देंहटाएं
  6. होली पर बहुत सुन्दर गीत
    ब्लॉग पर अनियमितता होने के कारण आप से माफ़ी चाहता हूँ .

    उत्तर देंहटाएं
  7. होली की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह वाह …………होली के बहुत ही मनोहारी रंग भर दिये हैं……………बहुत सुन्दर गीत्।

    उत्तर देंहटाएं
  9. होली पर बहुत सुन्दर और सार्थक गीत

    उत्तर देंहटाएं
  10. होली की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं...

    उत्तर देंहटाएं

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