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सोमवार, 21 मार्च 2011

"कुछ शब्द सरल भर दो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

माँ मेरी रचना में, कुछ शब्द सरल भर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।

 

दिन-रात तपस्या कर, मैंने पूजा तुमको,

जीवन भर का मेरा, संधान सफल कर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।

 

कुछ भी तो नहीं मेरा, माँ सब कुछ है तेरा,

इस रीती गागर में,  निज स्नेह सबल भर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। 

 

लिखता हूँ जो कुछ मैं, वो धूमिल हो जाता,

मसि देकर माता तुम, छवि धवल-प्रबल कर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।

 

जितना माँगा मैंने, उससे है अधिक दिया,

मनके मनकों को तुम, माता उज्जवल कर दो।

गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।


22 टिप्‍पणियां:

  1. maan srsvti shighr hi aapki vndna svikar kre . akhtar khan akela kota rajsthan

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  2. कुछ भी तो नहीं मेरा, माँ सब कुछ है तेरा,
    इस रीती गागर में, निज स्नेह सबल भर दो ...


    नमस्कार शास्त्री जी .... बहुत सुंदर ... मधुर प्रार्थना की तरह है ये गीत ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर मधुर भावमयी वंदना.

    उत्तर देंहटाएं
  4. शास्त्री जी
    माँ की इस भावमयी सरल शब्दो मे की गयी वन्दना से मन अभिभूत हो गया………बहुत अच्छी लगी आज की ये रचना जैसे हम सबके मन की बात आपने कह दी हो।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर भावमयी सरस्वती वंदना..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. विनम्रता और समर्पण के भावों की अनुगूँज से ही ऐसी प्रार्थना उपजती है !
    आभार,शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  7. मां सरस्वती की वंदना बहुत अच्छी लगी धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  8. साधना की पराकाष्ठा अभिव्यक्ति की सरलता लाती है।

    उत्तर देंहटाएं
  9. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22 -03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  10. गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।।
    bahut sundar prarthna.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत खुबसूरत सुरों में सजी प्यारी सी वंदना |

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ख़ूबसूरत, मधुर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने !

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  13. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  14. होठों से छू लो तुम............
    इस धुन पर क्या सुंदर और स-रस प्रस्तुति दी है शास्त्री जी| नमन आदरणीय|

    उत्तर देंहटाएं
  15. "गीतों के सागर से ,सब दूर गरल करदो "
    बहुत अच्छी प्रार्थना की है |बधाई
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुंदर भाव मानो शब्दों की सरिता बह रही हैं

    उत्तर देंहटाएं
  17. आज 19/मार्च/2015 को आपकी पोस्ट का लिंक है http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं

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