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बुधवार, 15 मई 2013

"पीड़ा के पाँच दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जिनके मिलने से मिले, मन को खुशी अपार।
ऐसे सज्जनवृंद तो, मिलने अब दुश्वार।१।

अन्धकूप में खोजते, रत्नों को हम आज।
बिना पारखी दृष्टि के, अन्धा हुआ समाज।२।

नजर नजर का फेर है, नजर नजर की बात।
जिसकी नजर सुधर गई, मिली उसे सौगात।३।

शिक्षक व्यापारी बने, गुरू हो गये मौन।
कर देकर शिक्षा मिली, हुई दीक्षा गौण।४।

ज्ञान और विज्ञान की, हुई धार अब मन्द।
पाणिनि की व्याकरण के, पृष्ठ हो गये बन्द।५।

14 टिप्‍पणियां:

  1. जिनके मिलने से मिले, मन को खुशी अपार।
    ऐसे सज्जनवृंद तो, मिलने अब दुश्वार।१

    हर दोहा गहरी मार करता हुआ साथ मे दिल के दर्द को भी उजागर कर गया

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या बात है गुरु जी ?
    आपका जवाब नहीं
    हमारे लिए तो आप ही गुरु हो
    आप हीरा हो तो हम भी अच्छे पारखी हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. सभी दोहे सार्थक और सटीक संदेश देते हैं,आभार आदरणीय.

    उत्तर देंहटाएं
  4. हमेशा की तरह बहुत सुंदर दोहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच को दर्शाते बढ़िया दोहे सर!
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं

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