"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

शुक्रवार, 31 मई 2013

"जल जीवन की आस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

ओस चाटने से बुझे, नहीं किसी की प्यास।
जीव-जन्तुओं के लिए, जल जीवन की आस।।

गन्धहीन-बिन रंग का, पानी का है अंग।
जिसके साथ मिलाइए, देता उसका रंग।।

पानी का संसार में, सीमित है भण्डार।
व्यर्थ न नीर बहाइए, जल जीवन आधार।।

जल अमोल है सम्पदा, मानव अब तो चेत।
निर्मल जल के पान से, सोना उगलें खेत।।

वृक्ष बचाते धरा को, देते सुखद समीर।
लहराते जब पेड़ हैं, घन बरसाते नीर।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए शनिवार 01/06/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छा लिखा है, भारत में तो पानी के लिये लड़ाई होना अब रोज अखबारों में दिखाई देने लगा है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह आदरणीय गुरुदेव श्री बहुत ही सुन्दर शिक्षाप्रद दोहावली, सुन्दर सन्देश देते दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    जल अमोल है सम्पदा, मानव अब तो चेत।
    निर्मल जल के पान से, सोना उगलें खेत।। वाह वाह वाह

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बेहद सुन्दर रचना
    हमेशा एक सन्देश रहता हैआपकी रचना में

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुदर रचना
    तस्वीर बहुत आकर्षक है..

    उत्तर देंहटाएं
  8. पानी का संसार में, सीमित है भण्डार।
    व्यर्थ न नीर बहाइए, जल जीवन आधार।।-----

    सहजता से गंभीर सीख देते दोहे
    अदभुत
    सादर

    आग्रह है पढें
    तपती गरमी जेठ मास में---
    http://jyoti-khare.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत बढ़िया दोहे, उत्तम सन्देश!

    उत्तर देंहटाएं
  10. जल है तो कल है ..
    जल की महत्ता समझाकर बहुत सुन्दर सन्देश देती सार्थक प्रस्तुति ..

    उत्तर देंहटाएं
  11. जल बिन सब सूना लगे, राज-काज व्यवहार।
    नीर बिना सब शून्य है, जीवन का संसार।।

    उत्तर देंहटाएं
  12. अति सुन्दर , शिक्षाप्रद

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails