ओस
चाटने से बुझे, नहीं किसी की प्यास।
जीव-जन्तुओं
के लिए, जल जीवन की आस।।
गन्धहीन-बिन
रंग का, पानी का है अंग।
जिसके
साथ मिलाइए, देता उसका रंग।।
पानी
का संसार में, सीमित है भण्डार।
व्यर्थ
न नीर बहाइए, जल जीवन आधार।।
जल
अमोल है सम्पदा, मानव अब तो चेत।
निर्मल
जल के पान से, सोना उगलें खेत।।
वृक्ष
बचाते धरा को, देते सुखद समीर।
लहराते
जब पेड़ हैं, घन बरसाते नीर।।
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आपने लिखा....
जवाब देंहटाएंहमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए शनिवार 01/06/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है .
धन्यवाद!
बहुत अच्छा लिखा है, भारत में तो पानी के लिये लड़ाई होना अब रोज अखबारों में दिखाई देने लगा है.
जवाब देंहटाएंबहुत प्रभावी रचना।
जवाब देंहटाएंबहुत उम्दा, प्रस्तुति,,
जवाब देंहटाएंवाह आदरणीय गुरुदेव श्री बहुत ही सुन्दर शिक्षाप्रद दोहावली, सुन्दर सन्देश देते दोहों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.
जवाब देंहटाएंजल अमोल है सम्पदा, मानव अब तो चेत।
निर्मल जल के पान से, सोना उगलें खेत।। वाह वाह वाह
वाह ... बहुत ही अच्छी प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसादर
बहुत प्रभावशाली.
जवाब देंहटाएंरामराम.
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(1-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
जवाब देंहटाएंसूचनार्थ!
बेहद सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंहमेशा एक सन्देश रहता हैआपकी रचना में
संदेशप्रद रचना, बधाई.
जवाब देंहटाएंबहुत सुदर रचना
जवाब देंहटाएंतस्वीर बहुत आकर्षक है..
sundar,prabhavpurn,sandeshvahk ke rup me kavita
जवाब देंहटाएंपानी का संसार में, सीमित है भण्डार।
जवाब देंहटाएंव्यर्थ न नीर बहाइए, जल जीवन आधार।।-----
सहजता से गंभीर सीख देते दोहे
अदभुत
सादर
आग्रह है पढें
तपती गरमी जेठ मास में---
http://jyoti-khare.blogspot.in
bahut acchha sandesh ...
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया दोहे, उत्तम सन्देश!
जवाब देंहटाएंजल है तो कल है ..
जवाब देंहटाएंजल की महत्ता समझाकर बहुत सुन्दर सन्देश देती सार्थक प्रस्तुति ..
जल सबके जीवन की रेखा
जवाब देंहटाएंजल बिन सब सूना लगे, राज-काज व्यवहार।
जवाब देंहटाएंनीर बिना सब शून्य है, जीवन का संसार।।
अति सुन्दर , शिक्षाप्रद
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