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बुधवार, 1 मई 2013

"वो मजे से दूर हैं-मजदूर दिवस पर..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


वो मजे में चूर हैं, बस इसलिए मग़रूर हैं
हम मजे से दूर हैं, बस इसलिए मजदूर हैं

आज भी बच्चे हमारे, बीनते कचरा यहाँ,
किन्तु उनके लाल, मस्ती के लिए मशहूर हैं

कोठियों को बनाकर, हम सो रहे फुटपाथ पर
उन निठल्लों के लिए तो, कोठियाँ भरपूर हैं

हम पसीने को बहाकर, सींचते जाते चमन
जो गुलों को नोचते, वो हो गये पुरनूर हैं

नक्कारखाने में फँसी, तूती बिचारी क्या करे
अंजुमन में लोग तो अपने नशे में चूर हैं  

लोकशाही का यहाँ, कितना घिनौना रूप है 
श्रमिकों के ख्वाब सारे आज चकनाचूर हैं 

21 टिप्‍पणियां:

  1. विडंबना ही है स्वयं मुश्किलें झेलते हैं और दूसरों जीवन सरल बनाते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. मजदूर दिवस पर सुन्दर प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक बेहतरीन प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मजदूर दिवस पर बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,

    RECENT POST: मधुशाला,

    उत्तर देंहटाएं
  6. उनके लिये धरती और आकाश सुखदायी हों।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सार्थक रचना
    बड़ा सवाल ये कि कब बदलेगी मजदूरों के हालत

    उत्तर देंहटाएं
  8. उदारीकृत अर्थ व्यवस्था पर जबरजस्त तंज आज की हकीकत है अब तो श्रम दिवस /मजदूर दिवस भी उदारीकरण के नीचे दम तोड़ चुका है .लेफ्टियों का कहीं कोई ज़िक्र नहीं हैं .तिहाड़ खोर चर्चा में रहते हैं .तीर्थों का तीर्थ बना हुआ है आज तिहाड़ और हमारे सुयोग्य सांसद यहाँ शोभायमान हैं .सदन ही खतरा बन गए हैं अब तो .

    उत्तर देंहटाएं
  9. जय जवान, जय किसान
    हिन्दुस्तान मे वर्गभेद नही है समुच्चय है

    उत्तर देंहटाएं
  10. अभी तक मजदूरों के हालत में कोई सुधार नहीं.... बहुत सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  11. मजदुर दिवस पर बहुत ही सार्थक प्रस्तुति,आभार.

    चलो साल में एक दिन

    याद करके अपने को चमकाते है

    मजदूरों को दधीच बना कर

    अपना इन्द्रलोक बचाते है

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. आजकल तो मजदूर भी कुछ मगरूर लगता है |
    मेहनत मशक्कत ईमान से कुछ दूर लगता है ||
    आम आदमी की सेवा से बच कर वह अब तो-
    पूँजी पति या 'मंरेगा' से चिपका भरपूर लगता है ||

    उत्तर देंहटाएं

  14. मजदूरों के जीवन को सच्ची तौर पर बयां करती रचना
    मजदूर दिवस पर सार्थक
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    दुनियां के मजदूरो एक हो
    मजदूरों को लाल सलाम

    विचार कीं अपेक्षा
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

    उत्तर देंहटाएं
  15. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

    उत्तर देंहटाएं
  16. आज के रोज भी शो वही चुरा ले जाते हैं जो अपने हितों को साधते हैं. बहुत वितृष्णा होती है देखकर.

    उत्तर देंहटाएं
  17. सेहतनामा को बिठाने के लिए चर्चा मंच का शुक्रिया .बेहद की मेहनत से तैयार पोस्ट .सेतु चयन सार्थक विविध रंगी .

    उत्तर देंहटाएं
  18. सार्थक प्रासंगिक पोस्ट श्रम दिवस पर .

    उत्तर देंहटाएं
  19. मजदूर दिवस को समर्पित अत्यंत प्रभावशाली रचना.

    लोकशाही का यहाँ, कितना घिनौना “रूप” है
    श्रमिकों के ख्वाब सारे आज चकनाचूर हैं

    बधाई.

    उत्तर देंहटाएं

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