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गुरुवार, 9 मई 2013

"मातृदिवस की शुभकामनाएँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
कल मातृदिवस था,
लेकिन नेट की समस्या के चलते
यह रचना पोस्ट नहीं हो पायी थी।
आप सबको मातृदिवस की 
शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ..!
जीवन देने वाली जननी, माता तुझको नमन हमारा।
माता नहीं कुमाता होती, माँ को उसका बालक प्यारा।।

तूने उच्चारण सिखलाया, रिश्ते-नातों को बतलाया,
खुद गीले में सोयी, लेकिन सूखे में था हमें सुलाया.
गणपति की तुम पार्वती हो, तुमसे तो विधना भी हारा।
माता नहीं कुमाता होती, माँ को उसका बालक प्यारा।।

कितने ही युग बदले लेकिन, बदल न पायी माँ की ममता,
बेटा हो या चाहे बेटी हो, माँ रखती दोनों में समता,
जीवनभर बालक को देती, उसकी माता सदा सहारा।
माता नहीं कुमाता होती, माँ को उसका बालक प्यारा।।

प्रथम गुरू हो तुम बालक की, जगदम्बा की तुम हो मूरत,
रची हुई है-बसी हुई है, सबके मन में माँ की सूरत,
हमें सजाया और सँवारा, माँ ने मेरा “रूप” निखारा।
माता नहीं कुमाता होती, माँ को उसका बालक प्यारा।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए शनिवार 11/05/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. चित-प्रकृति की कृपा और यह गौरव पा कर माँ स्वयं भी धन्य होती है -आपका आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. नारी का ये आराध्य रूप है...परन्तु हाल की कुछ घटनाएं व्यथित कर देने वालीं हैं...शायद आज लोग अपनी माँ, बहन, बेटी और बीवी से प्यार नहीं करते...अन्यथा देश को शर्मसार कर देने वाली ऐसी घटनाएं नहीं होतीं...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको .

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर चित्रण,आपका सदर आभार आदरणीय.

    जननी को जो पूजता , जग पूजै है सोय |
    महिमा वर्णन कर सके, जग में दिखै न कोय ||

    माँ तो जग का मूल है, माँ में बसता प्यार |
    मातृ-दिवस पर पूजता, तुझको सब संसार||

    उत्तर देंहटाएं
  6. माँ कि उस महिमा का सुन्दर चित्रण किया है जो हमारे हदय के अंदर बसी हुयी है लेकिन हम इन एक दिवसीय दिवसों में कोई यकीन नहीं करते !!

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सुंदर चित्रण माँ का... सुंदर प्रस्तुति!!धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  8. माँ की महिमा का सुन्दर चित्रण

    उत्तर देंहटाएं
  9. माँ की महिमा बखानती सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  10. आपको भी मातृदिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं..

    उत्तर देंहटाएं
  11. माँ का सच्चा स्वरूप वर्णन किया है आपने, सुन्दर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  12. माँ के बारे में बिलकुल सही लिखा है आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर भाव शास्त्री सर!
    मगर जहाँ तक हमें पता है, आप ने कोई देरी नहीं की ... 'मातृ दिवस' तो रविवार १२ मई को है! :-)
    ~सादर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. प्रथम गुरू हो तुम बालक की, जगदम्बा की तुम हो मूरत,
    सच कहा है मित्र, कुरान शरीफ में कहा गया है-माता पहली मुअल्लामा(गुरु) है |

    उत्तर देंहटाएं
  15. रची हुई है-बसी हुई है, सबके मन में माँ की सूरत,
    हमें सजाया और सँवारा, माँ ने मेरा “रूप” निखारा।
    माता नहीं कुमाता होती, माँ को उसका बालक प्यारा।।
    भावमय करते शब्‍द .... अनुपम प्रस्‍तुति

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  16. माँ बस माँ होती है ......सब माताओ को नमन ............बहुत सुन्दर प्रस्तुति .......

    उत्तर देंहटाएं
  17. अति उत्तम प्रस्तुति...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  18. माँ का सुन्दर चित्रण

    उत्तर देंहटाएं

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