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बुधवार, 8 मई 2013

"दुनिया की नियति" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


कभी खुशी
कभी गम
कभी प्रकाश 
कभी तम
हर रोज
सुबह आयेगी,
शाम ढलेगी
रात जायेगी
और
फिर सुबह होगी
जिन्दगी यूँ ही
तमाम होगी
पर
इन्तजार
खत्म न होगा
हर हाल में
हमें चलना ही होगा
क्योंकि जीवन का नाम
गति है
दुनिया की
यही तो नियति है.....!

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर शास्त्री जी....
    ऐसे शब्दों की आज ज़रुरत सी लग रही थी...
    अच्छा लगा पढ़ कर....
    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  2. behataren, yun hi shilshila chalta rahega chalte rahne ka

    उत्तर देंहटाएं
  3. गति ही जीवन है यही दुनिया की नियति है...... बहुत सुंदर प्रस्तुति!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. गति ही जीवन है,बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सही कहा चलना ही जिंदगी है बहुत खूब बधाई आदरणीय

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस गति को आगे बढ़ाना होगा .... चलना होगा ...
    वास्तिविकता को लिखा है ... नमस्कार शास्त्री जी ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर दार्शनिक अभिव्यक्ति. ....

    उत्तर देंहटाएं
  8. गुरु जी प्रणाम
    बहुत सार्थक रचना शिक्षाप्रद

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सार्थक प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही उत्तम भाव लिए रचना..
    चलना ही जीवन है...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं

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