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बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

"अनजानी सी राहें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 

अनजाना है सफर सामने अनजानी सी राहें हैं।
चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

कुछ पथ बालू से लथपथ, कुछ में कंटक नूकीले,
कुछ टेढ़े-मेढ़े-सँकरे हैं, लेकिन हैं कुछ पथरीले,
भोला पथिक उठाता अपनी चारों ओर निगाहें हैं।
चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

किससे पूछें पता-ठिकाना, कौन राह बतलाए,
असमंजस में पड़ा मुसाफिर, कौन दिशा को जाए,
पगडण्डी मिल गई सड़क में, भटक रहे चरवाहे हैं।
चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

जिसको सीधी डगर मिली, उसने है मंजिल पाई,
जिसने गलत मार्ग पकड़ा है उसने उमर गँवाई,
दुनियादारी के मेले में, कुछ खुशियाँ-कुछ आहें हैं,
चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही गम्भीर भावों से ओत प्रोत जीवन का सच उजागर करती आपकी रचना दिल को छु गयी....बहुत सुंदर।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सारगर्भित पोस्ट सोचने को मजबूर करती....

    उत्तर देंहटाएं
  3. कविता नहीं यह जीवन दर्शन है,,, दोराहों चौराहों से बचाती हुई...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहद सरल ढंग से कही गई अत्यंत प्रेरक रचना!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी आज की यह रचना कुछ अलग तरह की है. सुंदर.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुनदर ,सरल मगर ठोस अभिव्यक्ति।

    उत्तर देंहटाएं
  7. दुनियादारी के मेले में, कुछ खुशियाँ-कुछ आहें हैं,
    चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।
    bahut achchgi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  8. कितने ही मार्गों में बटती जीवनी।

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी ओर कुछ अलग हट के लगी आज की रचना धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  10. किससे पूछें पता-ठिकाना, कौन राह बतलाए,
    असमंजस में पड़ा मुसाफिर, कौन दिशा को जाए,
    पगडण्डी मिल गई सड़क में, भटक रहे चरवाहे हैं।
    चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

    वाह बहुत सुंदर और बहुत अच्छा विश्लेषण. शास्त्री जी बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  11. जिसको सीधी डगर मिली उसने ही मंजिल पायी..
    चहल पहल से भरे सब दोराहे चौराहे हैं ...

    जीवन के सफर का अच्छा वर्णन किया है...
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  12. जिसको सीधी डगर मिली, उसने है मंजिल पाई,
    जिसने गलत मार्ग पकड़ा है उसने उमर गँवाई,

    बहुत ही सुन्दर
    --------------
    मेरी बदमाशियां......
    http://rimjhim2010.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. जिसको सीधी डगर मिली, उसने है मंजिल पाई,
    जिसने गलत मार्ग पकड़ा है उसने उमर गँवाई,
    दुनियादारी के मेले में, कुछ खुशियाँ-कुछ आहें हैं,
    चहल-पहल से भरे हुए सब दोराहे-चौराहे हैं।।

    जीवन दर्शन कराती सारगर्भित पोस्ट्।

    उत्तर देंहटाएं
  14. जिसको सीधी डगर मिली, उसने है मंजिल पाई,
    जिसने गलत मार्ग पकड़ा है उसने उमर गँवाई,
    बहुत सार्गर्भित रचना है। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  15. गहन जीवन दर्शन से परिपूर्ण बहुत सारगर्भित रचना..आभार

    उत्तर देंहटाएं

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