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बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

"होलीगीत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

मित्रों!
मेरी मजबूरी यह है कि शब्द जोड़ तो लेता हूँ 
मगर माना नहीं जानता हूँ।
Bambuser पर आज पहली बार गाने का प्रयास किया है! 
आशा है कि आपको यह होली का गीत पसंद आयेगा।

आई बसन्त-बहार, चलो होली खेलेंगे!! 
रंगों का है त्यौहार, चलो होली खेलेंगे!! 

बागों में कुहु-कुहु बोले कोयलिया, 
धरती ने धारी है, धानी चुनरिया, 
पहने हैं फुलवा के हार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

हाथों में खन-खन, खनके हैं चुड़ियाँ. 
पावों में छम-छम, छनके पैजनियाँ, 
चहके हैं सोलह सिंगार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

कल-कल बहती है, नदिया की धारा. 
सजनी को साजन लगता है प्यारा, 

मुखड़े पे आया  निखार, 
चलो होली खेलेंगे!! 

उड़ते अबीर-गुलाल भुवन में 
सिन्दूरी-सपने पलते सुमन में, 
महके है मन में फुहार!  
चलो होली खेलेंगे!! 

13 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री जी
    नमस्कार !
    कल-कल बहती है, नदिया की धारा. सजनी को साजन लगता है प्यारा,
    ...........बहुत सुन्दर होलीगीत

    उत्तर देंहटाएं
  2. वसन्त की आप को हार्दिक शुभकामनायें !
    कई दिनों से बाहर होने की वजह से ब्लॉग पर नहीं आ सका
    बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

    उत्तर देंहटाएं
  3. शब्द , स्वर व संचार की जुगलबंदी !
    बढ़िया !

    उत्तर देंहटाएं
  4. शब्दों और स्वर का सुन्दर समन्वय... होली की शुरुआत वसंत पंचमी से हो जाती है..

    उत्तर देंहटाएं
  5. जितना सुन्दर गीत उतना ही मस्ती भरा उच्चारण, ब्लॉग नाम आज सिद्ध कर दिया आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  6. शब्द और आवाज़ दोनों प्रभावित करते हैं.... आदरणीय शास्त्रीजी बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह जी वाह ये तो कमाल हो गया अब तो गाने मे भी इतना सुन्दर स्वर्…………माँ सरस्वती की आप पर ऐसे ही कृपा बनी रहे………………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  8. कल ही सुन लिया था यह गीत और आपके बार बार कहने पर कि आप गाना नहीं जानते ...हम यह मानने को तैयार नहीं :)
    सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत मनमोहक और प्रवाहपूर्ण सुन्दर होली गीत

    उत्तर देंहटाएं
  10. मेरा तो अभी से होली खेलने का मन हो गया है। होली है।

    ---------
    ब्‍लॉगवाणी: एक नई शुरूआत।

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुंदर..!! हार्दिक शुभकामनाएँ..!!

    उत्तर देंहटाएं

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