"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 20 फ़रवरी 2011

"सबके प्यारे बन जाओगे?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मैं तुमको गुरगल कहता हूँ,
लेकिन तुम हो मैना जैसी।
तुम गाती हो कर्कश सुर में,
क्या मैना होती है ऐसी??

सुन्दर तन पाया है तुमने,
लेकिन बहुत घमण्डी हो।
नहीं जानती प्रीत-रीत को,
तुम चिड़िया उदण्डी हो।।

जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाकर,
तुम आगे को बढ़ती हो।
अपनी सखी-सहेली से तुम,
सौतन जैसी लड़ती हो।।

भोली-भाली चिड़ियों को तुम,
लड़कर मार भगाती हो।
प्यारे-प्यारे कबूतरों को भी,
तुम बहुत सताती हो।।

मीठी बोली से ही तो,
मन का उपवन खिलता है।
अच्छे-अच्छे कामों से ही,
जग में यश मिलता है।।

बैर-भाव को तजकर ही तो,
अच्छे तुम कहलाओगे।
मधुर वचन बोलोगे तो,
सबके प्यारे बन जाओगे।।

16 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी सुंदर पंक्तियां संजोने के लिए बाल-मन से धनी होने का वरदान अत्यावश्क है. आप सौभग्यवान हैं. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. मीठी बोली से ही तो,
    मन का उपवन खिलता है।
    अच्छे-अच्छे कामों से ही,
    जग में यश मिलता है।।

    मैना के माध्यम से सार्थक सीख देती सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया!

    मगर यह तो समूह में

    बहुत प्यार से

    मिलजुलकर रहती है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सार्थक रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. ::बैर-भाव को तजकर ही तो,अच्छे तुम कहलाओगे।मधुर वचन बोलोगे तो,सबके प्यारे बन जाओगे।::
    jiwandarshan hoti hain aapki kavita.. aapki panktiyaan

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (21-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  7. जग में रह जायेंगे , प्यारे मीठे बोल ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. अंतिम दोनों छंद असली सन्देश दे जाते हैं. लोगों को अनुकरण करना चाहिए.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बच्चों क्या बड़ों को भी सन्देश देती हुई सुंदर रचना ,बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  10. बच्चों के लिए एक बहुत सुन्दर और सीख देनेवाली रचना..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. बैर-भाव को तजकर ही तो,
    अच्छे तुम कहलाओगे।
    मधुर वचन बोलोगे तो,
    सबके प्यारे बन जाओगे ...

    bahuty khoob ... aapke samjhaane का andaaz भी lajawab है Shastri जी ....
    Maza aa gaya ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. मीठी बोली से ही तो,
    मन का उपवन खिलता है।
    अच्छे-अच्छे कामों से ही,
    जग में यश मिलता है।।

    सरल शब्दों में प्रेरणा देती हुई बाल कविता कहने में आपका हुनर निराला है.
    बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  13. प्रेरणा दायक मनमोहक सुन्दर गीत...वाह...
    कितनी सुन्दर बात कही है आपने...

    उत्तर देंहटाएं
  14. मैना की उद्दंडता के बहाने अच्छी सीख दी ...
    सुन्दर गीत !

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails