"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

"ग़ज़ल-आशा शैली हिमाचली" (प्रस्तोता-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


♥ ग़ज़ल ♥
श्रीमती आशा शैली "हिमाचली" 
ज़रा रुको तो कोई ज़िन्दगी की बात करें
फिर एक बार मुलाकात अपने साथ करें

तुम आसमां के हमें ख्वाब क्यों दिखाते हो
ज़मी के लोग हैं हम इस ज़मी की बात करें

उजाड़ जंगलों में क्या तलाशने निकले
चलो नदी पे नहीं तो नदी की बात करें

पिरामिडों में दफ़्न दौलतों को भूलो भी
किसी के ग़म की किसी की खुशी की बात करें

मुहब्बतों की बात यह जहान भूल गया
ये ज़िंदगी है तो ज़िन्दादिली की बात करें

कदम-कदम पे नफरतों के अन्धेरे हैं यहाँ
वफ़ाशआर किसी रौशनी की बात करें

ग़ज़ल का दौर है शैली कोई कलाम पढ़ो
इस अंजुमन में क्यों न ताज़गी की बात कर
श्रीमती आशा शैली "हिमाचली"


19 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sundar. asha shaili ji ko dhanywad. unhe shubh tarika me bhi khoob padhne ko milta tha.

    उत्तर देंहटाएं
  2. कदम-कदम पे नफरतों के अन्धेरे हैं यहाँ
    वफ़ाशआर किसी रौशनी की बात करें

    बहुत खूब !! उम्दा ग़ज़ल !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुम आसमां के हमें ख्वाब क्यों दिखाते हो
    ज़मी के लोग हैं हम इस ज़मी की बात करें
    bahut achchi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी ग़ज़ल है.. आशा जी को बधाई. दाद कबूल करें.

    उत्तर देंहटाएं
  5. तुम आसमां के हमें ख्वाब क्यों दिखाते हो
    ज़मी के लोग हैं हम इस ज़मी की बात करें
    बहुत खूब , उम्दा ग़ज़ल ......

    उत्तर देंहटाएं
  6. नमस्कार शास्त्री जी,देर से आने की माफ़ी ! आशा जी की ग़ज़ल आला दर्जे की हे बधाई उनके साथ आपको भी क्योकि आप ने ही उनसे रूबरू कराया हे --धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  7. तुम आसमां के हमें ख्वाब क्यों दिखाते हो
    ज़मी के लोग हैं हम इस ज़मी की बात करें
    .
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (17-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. ज़मी के लोग हैं हम इस ज़मी की बात करें
    बहुत खूब.. उम्दा ग़ज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  10. मुहब्बतों की बात यह जहान भूल गया
    ये ज़िंदगी है तो ज़िन्दादिली की बात करें

    umdaa gazal.

    उत्तर देंहटाएं
  11. शास्त्री जी इस प्रस्तुतिके लिये धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत बेहतरीन गज़ल पढ़वाई..आशा जी की और रचनायें प्रस्तुत करें.

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails