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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

"प्रेम दिवस सप्ताह पर एक पुरानी रचना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


"प्रेम दिवस सप्ताह पर एक पुरानी रचना"

सात रंग में, रूप तुम्हारा,छिपा हुआ है नया-नया।
सावन-भादों मे छायेगा, रूप तुम्हारा नया-नया।।

सीपों के मोती में पाया,रूप तुम्हारा नया-नया।
सागर तल में गहरायेगा,रूप तुम्हारा नया-नया।।

रचा-बसा चन्दा-मामा में,रूप तुम्हारा नया-नया।
रात चाँदनी में आयेगा,रूप तुम्हारा नया-नया।।

मलयानिल के झोंको में है,रूप तुम्हारा नया-नया।
प्रेम-दिवस पर छा जायेगा,रूप तुम्हारा नया-नया।

10 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर और भावपूर्ण रचना ।
    .......बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक-एक शब्द भावपूर्ण ..... बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह वाह , क्या बात है.
    बहुत प्यारा लिखते हैं आप , शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत लाजवाब, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह आपकी उप्रोक्य पंक्तियों ने मान को मोह लिया...
    मेरे ब्लॉग पर आपके आशीर्वाद ने मुझे आत्मीय प्रसन्नता प्रदान किया है, मुझ अकिंचन कि ओर से बधाई एवं आभार स्वीकार करें |

    उत्तर देंहटाएं

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