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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

"आज एक आत्मबोध कराता हुआ गीत सुनिए!"

आइए !
आज एक आत्मबोध कराता हुआ गीत सुनिए!
यह गीत मेरा नहीं है लेकिन इसको स्वर दिया है सुश्री मिथलेश आर्या ने!


जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया।
जब शम्मा बुझ चुकी तो महफिल में रंग आया।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. मन को छू गई गीत.. स्वर भी बढ़िया.. बहुत बहुत आभार महेंद्र जी से परिचय के लिए..

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  2. EXCELLENT VOICE AND MEANINGFUL SONG. THANKS.
    PLEASE SEND THE TEXT MEAN LYRICS ALSO THROUGH BLOG.
    ONCE AGAIN THANK.S

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत मधुर आवाज मे एक सुंदर गीत धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच में अंदर तक आत्मावलोकन करा दिया इस गीत ने...बहुत बढ़िया..आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  5. मधुर आवाज मे एक सुंदर गीत ,बहुत बढ़िया !

    उत्तर देंहटाएं
  6. मनको छू जाने वाला गीत और उतनी ही सुन्दर आवाज..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं

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