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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

"मधुबन में मुस्काया बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


बीता पतझड़ आया बसन्त।
मधुबन में मुस्काया बसन्त।।
 पेड़ों ने पाये नये वस्त्र,
पौधों ने किया सिंगार नवल,
गेहूँ के बिरुवे झूम रहे,
हँस रही बालियाँ मचल-मचल,
सबके मन को भाया बसन्त।
मधुबन में मुस्काया बसन्त।।
बासन्ती सुमनों की आभा,
दे रही प्रणय का अभिमन्त्रण,
 मधुमक्खी ने स्वीकार किया,
पुष्पों का स्नेहिल-आमन्त्रण,
खुशियों को लाया है बसन्त।
मधुबन में मुस्काया बसन्त।।
मनभावन पुष्पों पर तितली,
मतवाली होकर बैठी है,
पाकर पराग मीठा-मीठा
अपनी धुन में ही ऐंठी है,
नयनों में है छाया बसन्त।
मधुबन में मुस्काया बसन्त।।
झाड़ी के पीछे से आकर,
झाँकता भास्कर अमल-धवल,
अनुपम छवियों से भरमाते,
तालाबों में खिल रहे कमल,
तन-मन में गदराया बसन्त।
मधुबन में मुस्काया बसन्त।।

23 टिप्‍पणियां:

  1. kya baat hai shastri ji.madhuban me muskaya basant padh kar mukh per bhi muskaan aa gai.bahut hi khoobsurat geet likha hai aapne.aapko hardik badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. लग रहा है बसंत आ गया..बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. चलिए हम भी वसंत के रगं में सराबोर हो जाते है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अब अपनी दिनचर्या भी इससे प्रभावित हो रही है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज चर्चा मंच पर आपकी सालगिरह की जान कारी मिली |आपका जन्मदिन इसी प्रकार हर वर्ष आए और जीवन बहुतसारी खुशियों से भर दे |जीवन में सफलता के सर्वोच्च शिखर पर अपना स्थान बनाएँ |मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  6. आदरणीय गुरु जी को जन्मदिन पर गुफ्तगू की ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाये और बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर वसंत गीत..जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें..

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीय शास्त्री जी ,
    नमस्कार .
    सर्वप्रथम आपको जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएं .बहुत सुंदर कविता लिखी है आपने बसंत पर.सुन्दरता से किया है बसंत का वर्णन .बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  9. aadarniya shastri ji ,

    sadar pranam ,

    janama-din ki badhayi ,anekon basant
    dekhane ki shubh- kamna.kya bat hai
    aapke hanthon basant aur basanti ho gaya.umang laya anang ke sang,ahsas
    kara gaya .bahut -2 dhanyavad .

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत ही सुन्दर कविता पढ़ते - पढ़ते हम तो खेतों मै ही खोने से लगे थे !

    हर शब्द जेसे खुद बोल रहा हो !

    आपका बहुत - बहुत शुक्रिया !

    उत्तर देंहटाएं
  11. झाड़ी के पीछे से आकर,झाँकता भास्कर अमल-धवल,अनुपम छवियों से भरमाते,तालाबों में खिल रहे कमल,तन-मन में गदराया बसन्त।मधुबन में मुस्काया बसन्त।।

    बेहद खूबसूरत वसन्त गीत्………अपनी आहट दे रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. वसंत की यह सचित्र झांकी और शब्‍द रचना अनुपम ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. मयंक साहब..

    बहुत सुन्दरता से आपने सौन्दर्य का चित्रण किया है.. चित्र और भी सुन्दर हैं..!!

    उत्तर देंहटाएं
  14. कविता के साथ चित्रों ने भी बसंत के आगमन की सूचना दे दी है ....बहुत सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  15. .

    वैसे तो पता ही होगा फिर भी पोस्ट में पाठकों में उपस्थिति दर्ज कराने के बहाने कुछ जानकारी अनजानों के लिये दे रहा हूँ.
    बसंत ऋतु के आगमन से १० दिन पूर्व पसंत पंचमी पड़ती है. ८० प्रहरों के पहले बसंत पंचमी का आना और ऋतुराज बसंत के स्वागत की तैयारी में प्रकृति को सजाना-सँवारना वैदिक आथित्य परम्परा है जिसका हमारे त्यौहार भी संकेत रूप में निर्वहन करते हैं.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  16. .

    एक कविता "बसंत-प्रतीक्षा" नाम की...

    अशीति प्रहर के बाद
    पिकानद आवेगा, उन्माद
    भरेगा आँखों में चुपचाप
    कुहुक गूँजेगा कोकिल नाद.

    ढाक के पिंगल फूल
    डाल देंगे आँखों में धूल.
    लगी हो जैसे तरु में आग
    दूर से देखन में हो भूल.

    अशोक पुष्प रतनार
    खिलेंगे जब बाला सुकुमार
    नृत्य करने के बाद प्रहार
    पगों का देगी वो उपहार.

    .

    उत्तर देंहटाएं
  17. शास्त्री जी,सबसे पहले तो जन्मदिन की हार्दिक बधाई --उसके बाद, आपने बहुत सुंदर कविता लिखी हे --सचमुच वसंत आ गया

    उत्तर देंहटाएं
  18. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सुन्दर वसंत गीत....बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं

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