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बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

"औआ-औआ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


कल एक बाल कविता लिखी थी!
मेरे आग्रह पर इसे मेरी मुँहबोली भतीजी 
अर्चना चावजी ने बहुत मन से गाया है!
आप भी इस बाल कविता का रस लीजिए!

काले रंग का चतुर-चपल,
पंछी है सबसे न्यारा।
डाली पर बैठा कौओं का, 
जोड़ा कितना प्यारा।

नजर घुमाकर देख रहे ये,
कहाँ मिलेगा खाना।
जिसको खाकर कर्कश स्वर में,
छेड़ें राग पुराना।।

काँव-काँव का इनका गाना,
सबको नहीं सुहाता।
लेकिन बच्चों को कौओं का,
सुर है बहुत लुभाता।।

कोयलिया की कुहू-कुहू,
बच्चों को रास न आती।
कागा की प्यारी सी बोली, 
इनका मन बहलाती।।

देख इसे आँगन में,
शिशु ने बोला औआ-औआ।
खुश होकर के काँव-काँवकर,
चिल्लाया है कौआ।।

29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर बाल गीत और अर्चना जी ने पूरे मनोयोग से गाकर और भी सुन्दर बना दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर बाल कविता...
    अर्चना चावजी की मधुर आवाज़ ने इसमें चार चाँद अलग से लगा दिए

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर बाल गीत और अर्चना चावजी की मधुर आवाज़!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्दर बाल गीत जी, और अर्चना चावजी की मधुर आवाज़ ने इस मे जान डाल दी धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. कमाल है शास्त्री जी!!
    बाल गीत पढा और ....
    एक मधुर मुस्कान सहेजे हुए यह टिप्पणी लिख रहा
    हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बचपन याद आ गया....
    एकदम बालसुलभ अंदाज़ में गाया है अर्चना जी ने.... बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  7. मधुर स्वर में एक सुंदर गीत, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर बाल गीत .. और उतनी ही प्यारी आवाज़ में अर्चना जी ने गाया है ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्यारी बाल कविता और अर्चना जी ने गाया भी बहुत उम्दा है, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  10. कविता तो पहले ही पढ़ी थी. बहुत अच्छी लगी थी। अर्चना जी ने स्वर देकर उसमें चारचाँद लगा दिया।

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर बाल गीत और अर्चना चावजी की मधुर आवाज़

    उत्तर देंहटाएं
  12. कोयलिया की कुहू-कुहू,
    बच्चों को रास न आती।
    कागा की प्यारी सी बोली,
    इनका मन बहलाती।।
    जी, तभी तो इस युग को घोर कलयुग कहते है !

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह नि:संदेह बहुत सुंदर रचना है

    उत्तर देंहटाएं
  14. कौवे में भी सुन्दरता तलाश ली. सरस गीत और गायन. आभार

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही सुन्दर बाल कविता, उतना ही सुन्दर गायन।

    उत्तर देंहटाएं
  16. शब्द और स्वर
    मधुर
    सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  17. शुक्रिया आप सभी का इसे पसन्द करने के लिए....दर असल तारीफ़ के हकदार चाचाजी हैं --किसी भी विषय पर तुरन्त लिख कर हाजिर....वाकई अच्छा लगा गाने में ...
    और जब पता लगा कि प्राची को पसन्द आया तो आनन्द दूना हो गया....मेरा

    उत्तर देंहटाएं
  18. अर्चना चावजी!
    आपने तो औआ-औआ गाकर कमाल कर दिया!
    मेरी 6 वर्षीया पोती प्राची इसे 20 बार सुन चुकी है! कम्प्यूटर के पास से हट ही नहीं रही है!
    और हाँ! उसने इसे पूरा याद भी कर लिया है!

    उत्तर देंहटाएं
  19. शास्त्री जी नमन|
    कौआ को ले कर सुंदर बाल कविता|

    उत्तर देंहटाएं
  20. shastri ji, yah baal kavita jitni pyari hai usse bhi zyada pyari aur madhur hai archna ji ki awaaz........


    alfaaz aur aawaz ka sumadhur sangam mubaraq ho !

    achha laga sun kar

    उत्तर देंहटाएं
  21. रचना बहुत सुन्दर है, और गायन भी बहुत सुन्दर है.

    उत्तर देंहटाएं
  22. अर्चना जी की आवाज मे भी बच्चो के आवाज जैसी एक अलग सी मिठास है.

    उत्तर देंहटाएं

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