"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

"नया निर्माण सामने आता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



पतझड़ के पश्चात वृक्ष नव पल्लव को पा जाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।

भीषण सर्दी, गर्मी का सन्देशा लेकर आती ,
गर्मी आकर वर्षाऋतु को आमन्त्रण भिजवाती,
सजा-धजा ऋतुराज प्रेम के अंकुर को उपजाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।
खेतों में गेहूँ-सरसों का सुन्दर बिछा गलीचा,
सुमनों की आभा-शोभा से पुलकित हुआ बगीचा,
गुन-गुन करके भँवरा कलियों को गुंजार सुनाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।
पेड़ नीम का आगँन में अब फिर से है गदराया,
आम और जामुन की शाखाओं पर बौर समाया.
कोकिल भी मस्ती में भरकर पंचम सुर में गाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।

परिणय और प्रणय की सरगम गूँज रहीं घाटी में,
चन्दन की सोंधी सुगन्ध आती अपनी माटी में,
भुवन भास्कर स्वर्णिम किरणें धरती पर फैलाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।
मलयानिल से पवन बसन्ती चलकर वन में आया,
फागुन में सेंमल-पलाश भी, जी भरकर मुस्काया,
निर्झर भी कल-कल, छल-छल की सुन्दर तान सुनाता।
विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।

28 टिप्‍पणियां:

  1. नव सृजन का सुन्दर स्वागत....बेहतरीन कविता..बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छे भाव समेटे बढ़िया रचना .


    यूपी खबर


    न्यूज़ व्यूज और भारतीय लेखकों का मंच

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर स्वागत गीत....सुंदर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  5. विध्वंस के बाद ही नव-नीर्माण सामने आता । अच्छा संदेश. आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर चित्रों के साथ संदेशपरक काव्य!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपने भी आज नव सृजन पर लगाई है और मैने भी…………ये तो कमाल हो गया……………बेहद खूबसूरत और प्रेरक रचना है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर रचना के साथ फोटो भी खूब मैच कर रहे है !

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर स्वागत गीत और तस्वीरें भी

    उत्तर देंहटाएं
  10. चहुं और जीन नव पल्वलवित हो रहा है. सुंदर चित्रों के साथ सुंदर रचना.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  11. विध्वंश के बाद ही नवनिर्माण होता है..बहुत सार्थक रचना..बहुत सुन्दर चित्रों से सजी हुई ..

    उत्तर देंहटाएं
  12. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर भाव विचार युक्त कविता है |

    उत्तर देंहटाएं
  14. जीवन का अनमोल सत्य उजागर करती कविता!!

    उत्तर देंहटाएं
  15. नव निर्माण व नव सृजन का संदेश देती प्रेरक कविता। आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  16. सुन्दर गीत है.गीत का मुखड़ा बहुत प्यारा है.

    उत्तर देंहटाएं
  17. विध्वंसों के बाद ही नवनिर्माण सामने आता है तो बेशकीमती हो जाता है ...
    मनमोहक चित्रों के साथ सुन्दर कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  18. नव सृजन का बहुत ही सुंदर स्वागत किया है आपने ... अप्पके द्वारा लगे गयी तसवीरें रचना को और निखारतीं हैं ... शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  19. सन्देश परक और सुन्दर रचना..
    पढ़कर सच में उदास मन भी हरा हो गया....
    कुछ पहले तक सोचा रहा था कि "..क्या लिखूं कोई बात बाकी नहीं...", और आपको पढ़ने के बाद दिल कह रहा है ''... सोचता हूँ क्या लिखूं, अब इतनी सारी बातें हैं.... "

    उत्तर देंहटाएं
  20. ऊर्जा से लबालब..और सुंदर चित्र..!!

    उत्तर देंहटाएं
  21. बड़ा सुन्दर देशभक्तिपूर्ण गीत है । आप की पत्नी का स्वर तो नहीं सुना पर यह जान कर ख़ुशी हुई कि वे गाती हैं ।
    आप दोनों सुरुचि सम्पन्न दम्पति हैं । आप सफल गीतकार भी हैं , यह गीत इस का प़माण है । बधाई आप दोनों को ।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails