"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

"छवि अपनी दिखलाती हो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
रोज-रोज सपनों में आकर,
छवि अपनी दिखलाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!

कभी हँस पर, कभी मोर पर,
जीवन के हर एक मोड़ पर,
भटके राही का माता तुम,
पथ प्रशस्त कर जाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!

मैं हूँ मूढ़, निपट अज्ञानी,
नही जानता काव्य-कहानी,
प्रतिदिन मेरे लिए मातु तुम,
नव्य विषय को लाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!

नही जानता पूजन-वन्दन,
नही जानता हूँ आराधन,
वर्णों की माला में माता,
तुम मनके गुँथवाती हो!
शब्दों का भण्डार दिखाकर,
रचनाएँ रचवाती हो!!

16 टिप्‍पणियां:

  1. Bhut sundar rachna..sach me maa sharda kaise hume shakti de rachnaye rachwati hai..bhut achi bhawna.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर सतुति जी, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. aapki satwik kavita ne man ko achhu liya .prem aur shradha se nikalati
    ganga ke pavitra pravah sa pratit hua . sundar .

    उत्तर देंहटाएं
  4. यह पवित्र स्मरण क्या किसी अर्चना से कम है?

    उत्तर देंहटाएं
  5. नही जानता पूजन-वन्दन,नही जानता हूँ आराधन,वर्णों की माला में माता,तुम मनके गुँथवाती हो!शब्दों का भण्डार दिखाकर,रचनाएँ रचवाती हो!!
    नमो शारदे नमो शारदे


    regards

    उत्तर देंहटाएं
  6. बसंत पंचमी के अवसर में मेरी शुभकामना है की आपकी कलम में माँ शारदे ऐसे ही ताकत दे...:)

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज का यह गीत पढ़कर
    सच यही मुझको लगा --
    गीत में जो कह दिया है आपने!
    --
    जितनी प्रशंसा की जाए,
    उतनी ही कम है!
    --
    बच्चों के लिए भी
    यह एक अच्छा उपहार है!

    उत्तर देंहटाएं
  8. माँ सरस्वती का वरदहस्त यूं ही आप पर बना रहे...
    शुभकामनाएं बसन्त पंचमी की.

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह! बेहद खूबसूरत आराधना माँ सरस्वती की…………नमन है।बसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  10. कभी हँस पर, कभी मोर पर,
    जीवन के हर एक मोड़ पर,
    भटके राही का माता तुम,
    पथ प्रशस्त कर जाती हो!
    शब्दों का भण्डार दिखाकर,
    रचनाएँ रचवाती हो!!
    आद. मयंक जी, अर्चना की हर पंक्ति माँ शारदे के चरण कमलों में भक्ति एवं प्रेम का पुष्प अर्पित कर रही है !
    आपके लेखन की विशिष्ठता आपके गीतों में शब्दों की सादगी और भावों की गहराई से विभूषित होती है !
    बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  11. आप तो साक्षात सरस्वती पुत्र हैं, हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  12. मॉ शारदे की वंदना को बहुत ही आकर्षक शब्द दिया है आपने। आभार।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails