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सोमवार, 11 अप्रैल 2011

"मेरी नदी-एमिली डिकिंसन" (अनुवादक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


"मेरी नदी-एमिली डिकिंसन" 
  My River a poem by Emily Dickinson
अनुवादक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

मेरी नदी भागती है,
जिसकी ओर।
उसका कोई,
ओर न छोर।
--  
वह कोई नहीं है और,
नीला सागर है घनघोर।
जो स्वागत करता है मेरा,
होकर कितना भावविभोर।
--
करती हूँ मैं
उसके उत्तर की प्रतीक्षा।
जो विनयपूर्वक,
माँगता है पानी की भिक्षा।
--
मैं थामती हूँ,
उसका दामन।
और कहती हूँ-
ले लो मुझे,
अपने आगोश में।

Emily Dickinson

जन्म 10 दिसम्बर, 1830     
मृत्यु 15 मई, 1886 

27 टिप्‍पणियां:

  1. sunadar aur sukomal kavita

    bahut dinon bad aapki rachna banchne ka sanyog hua lekin aapke tevar me vahi taazgi dekh kar aanand mila

    badhai !

    उत्तर देंहटाएं
  2. वह कोई नहीं है और,
    नीला सागर है घनघोर।
    जो स्वागत करता है मेरा,
    होकर कितना भावविभोर ...

    Anuvaad rachna ki lay aur tarannum banaaye rakhta hai ... bahut hi lajawaab .... Rachna bhi bahut hi lajawaab hai ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह शास्त्री जी बहुत सुन्दर कवितायें हैं जिनका आप अनुवाद कर रहे हैं ……………यही तो नियति है नदी की सागर की ओर जाना और उसी मे खुद को समाहित कर देना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. अंग्रेजी की महत्वपूर्ण आधुनिक कवियत्रियों में एमिले डीकिन्सन को शामिल किया जाता है. उनकी कई रचनाएं पढने का अवसर मिला है मुझे.. कुछ अंग्रेजी के विद्यार्थी के रूप में कुछ साहित्य के विद्याथी के रूप में.. माई रिवर एक बेहद संवेदनशील कविता है उनकी.. आपने उसका अनुवाद भी बहुत बढ़िया किया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut pyaari,sukomal si rachna.anuvaad bhi jordaar hamesha ki tarah.

    उत्तर देंहटाएं
  6. माई रिवर एमिले डीकिन्सन की एक संवेदनशील कविता है, आपने अनुवाद बहुत बढ़िया किया है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. कितनी खुबसुरती से आप इन कविताओं को अनुवादीत कर रहे है...आनंद आ गया..बहुत ही सुंदर कविता और साथ ही भावपूर्ण रचना की उत्कृष्टता देखने को मिली....धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  8. वह कोई नहीं है और,
    नीला सागर है घनघोर।
    जो स्वागत करता है मेरा,
    होकर कितना भावविभोर।.........


    पढ़कर लगा ही नहीं कि अनुवाद है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. नदी और सागर का मिलन सदा ही ऐसे भाव लेकर आता है। बहुत ही सुन्दर कविता, उतना ही सुन्दर अनुवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बढ़िया रोचक प्रस्तुति ....सुन्दर रचना ... रचना के भाव बढ़िया लगे... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  12. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 12 - 04 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुन्दर कविता अनुवाद के रुप में...

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर अनुवाद ... अच्छा लगा आपको अनुवादक कवि के रूप में भी जान कर... सादर

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुंदर कविता और बहुत सुंदर अनुवाद ....
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  16. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  17. मैं थामती हूँ,
    उसका दामन।
    और कहती हूँ-
    ले लो मुझे,
    अपने आगोश में।

    bahut sundar anuvaad..aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  18. dono taraf se aisa sangam ho to fir jindgi swarg ban jaye. bahut acchha anuvad prayas.

    shukriya ham tak pahuchane ke liye.

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत ही खुबसूरत भावानुवाद है सर... एमिली डिकिन्सन की यह कविता सर्वथा नवीन रूप में सम्मुख आई है ... सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  20. शानदार भावानुवाद, सुन्दर कविता

    उत्तर देंहटाएं
  21. आपने सचमुच कमाल कर दिखाया। गद्य का अनुवाद ही एक मुश्किल काम होता है और काव्य का काव्य में अनुवाद तो वाक़ई एक जटिल काम है।
    शुक्रिया हिंदी ब्लॉगिंग को समृद्ध करने के लिए !

    http://auratkihaqiqat.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं

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