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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

"लोहा भी इस्पात बन गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


सुन्दर पैबन्दों को पाकर,
मखमल जैसा, टाट बन गया।
चाँदी की संगत में आकर,
लोहा भी इस्पात बन गया।।

गया अँधेरा-हुआ सवेरा,
उखड़ गया है तम का डेरा,
सूरज की किरणों को पाकर,
कितना सुन्दर प्रात बन गया।
चाँदी की संगत में आकर,
लोहा भी इस्पात बन गया।।

शाखों पर कलिकाएँ महकीं,
तितली सी बालाएँ चहकीं,
मुस्काते उपवन में आकर,
चन्दन जैसा गात बन गया।
चाँदी की संगत में आकर,

लोहा भी इस्पात बन गया।।

भँवरों में आ गई जवानी,
करते हैं गुंजार सुहानी,
फूलों की महफिल में जाकर,
अनुगामी विख्यात बन गया।
चाँदी की संगत में आकर,

लोहा भी इस्पात बन गया।।

सुस्ती भागी-मस्ती जागी,
त्यागी बन बैठे अनुरागी,
माया और मेनका पाकर,
अपराधी-कुख्यात बन गया।
चाँदी की संगत में आकर,
लोहा भी इस्पात बन गया।।
(सभी चित्र गूगल छवियों से साभार)

23 टिप्‍पणियां:

  1. सुस्ती भागी-मस्ती जागी,
    त्यागी बन बैठे अनुरागी,
    माया और मेनका पाकर,
    अपराधी-कुख्यात बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।...

    sundar geet.

    उत्तर देंहटाएं
  2. चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।

    क्या कहूं...आपके लिए कुछ भी कहना मेरे लिए मुमकिन नहीं
    यही कहूंगी- लाजवाब....
    लोहे को भी अपनी किस्मत पर नाज करा दिया आपने....

    उत्तर देंहटाएं
  3. कमाल की अभिव्यक्ति।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।
    वैज्ञानिक तौर पर लोहा कार्बन की संगत पा कर इस्पात बनता है |

    उत्तर देंहटाएं
  4. अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. माया और मेनका पाकर,
    अपराधी-कुख्यात बन गया।

    क्या बात है शास्त्रीजी पहले ज़माने में तो मेनका को पाकर विश्वामित्र बना करते थे.
    और विज्ञान के हिसाब से लोहे में मुख्य रूपसे कार्बन
    मिले तो ही इस्पात बनता है.
    अब संगत की तो महिमा ही निराली है.
    आपकी शानदार प्रस्तुति को प्रणाम.

    मेरे ब्लॉग पर दर्शन दें,नई पोस्ट जारी करदी है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया रचना ..संगत का असर तो होना ही है ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।
    bahut achchi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर चित्रों से सजी अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुस्ती भागी-मस्ती जागी,
    त्यागी बन बैठे अनुरागी,
    माया और मेनका पाकर,
    अपराधी-कुख्यात बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।

    बहुत खूब शास्त्री जी --कमाल की रचना है --

    उत्तर देंहटाएं
  10. शानदार लिखा है आपने. बधाई स्वीकार करें
    मेरे ब्लॉग पर आयें और अपनी कीमती राय देकर उत्साह बढ़ाएं
    समझो : अल्लाह वालो, राम वालो

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर पैबन्दों को पाकर,
    मखमल जैसा, टाट बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।
    बहुत सही कहा। सुन्दर रचना के लिये बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  12. सुस्ती भागी-मस्ती जागी,
    त्यागी बन बैठे अनुरागी,
    माया और मेनका पाकर,
    अपराधी-कुख्यात बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।...

    वाह वाह बहुत सुन्दर रचना…………और ये बात तो बिल्कुल सही कही है……………शानदार ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (23.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  14. माया और मेनका पाकर,
    अपराधी-कुख्यात बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।.....kya kahne hain.....bahut bahut pasand aai yeh kavita.

    उत्तर देंहटाएं
  15. शाखों पर कलिकाएँ महकीं,
    तितली सी बालाएँ चहकीं,
    मुस्काते उपवन में आकर,
    चन्दन जैसा गात बन गया।
    चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।


    आपकी यह कविता एक अलग ही भाव-संसार में ले जाती है..
    बहुत ही गहरे भाव....
    हार्दिक बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  16. चाँदी की संगत में आकर,
    लोहा भी इस्पात बन गया।।
    सुन्दर अभिव्यक्ति...शानदार रचना...आभार

    उत्तर देंहटाएं

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