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शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

"जंगली होते...." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


घर और परिवार
बन्धु-बान्धव
और रिश्तेदार
आदर और सत्कार
सभी कुछ तो है
लेकिन
कभी-कभी
आभास होता है
कि कुछ खालीपन है
और यहाँ भी
स्वार्थ का ही अपनापन है
--
जालजगत पर कदम बढ़ाया
तो यहाँ भी
साहित्य-सरोवर नज़र आया
किन्तु यह आभासी संसार है
सिर्फ दूर-दूर का ही प्यार है
लिखो तो
वाह-वाही और आभार है
न लिखो तो
कोई पूछने वाला भी नहीं है
जिन्दा हो
या
सिघार गये हो!
जीत गये हो
या हार गए हो!
--
यह सब देख कर
मन ऊब गया है
और
गहरी सोच में डूब गया है
--
जब मैं गया
पहाड़ों में, खेतों में
जंगल में-उपवन में
तब...
चैन और सुकून मिला
इस वैरागी मन में
--
यहाँ कोई स्वार्थ नहीं है
कोई बैर-भाव नहीं है
सहज मुस्कान है
यहाँ आकर तो
मिट गई सारी थकान है
--
काश् हम भी सुमन होते
झाड़ी के होते
या बगीचे के होते
क्या फर्क पड़ता?
इन्सानों की बस्ती के होते
या जंगली होते....
लेकिन होते तो... 
खुशियाँ बाँटने वाले 
फूल ही.........!

25 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया की दुनियादारी देख उदास होता मन ....!!
    सुंदर रचना ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. दुनिया की जो हालत है उससे मन दुखी ही होता है...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! शानदार प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  4. काश् हम भी सुमन होते
    झाड़ी के होते
    या बगीचे के होते
    क्या फर्क पड़ता?
    इन्सानों की बस्ती के होते
    या जंगली होते....
    लेकिन होते तो...
    खुशियाँ बाँटने वाले
    फूल ही.........!

    बहुत सुन्दर...बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut hi bhaav poorn sochne par majboor karti rachna.kuch kavitaon se alag hatke.badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  6. करते हैं हम दुआ ये, बुद्धि कर दो कम |

    बुद्धि से ही बढ़ रहे, दुनिया के सब गम ||


    छोटी - छोटी भंगिमा, भावों का सन्देश,

    कर नंगा सबसे कहे, किधर प्रेम कित द्वेष ||


    याददाश्त लम्बी हुई, भूले न अपमान |

    स्वार्थ किन्तु पल में परे, कर दे सब एहसान ||


    है सच्चा अब भी भला, बनमानुस भगवान् |

    दुनियादारी से बचा, यही सही इंसान ||

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह........

    शानदार !

    एक आत्मिक एहसास !

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस सप्ताह ब्लॉगजगत और ब्लागरों के व्यवहार, गुट ,लेखनी और इसके भविष्य कि चिंता करते बहुत से लोग देखे गए. बावजूद सामने से दिखने वाले प्रेम के यहाँ के ब्लोग्गेर्स इस आभासी दुनिया के तौर तरीके से बहुत अधिक संतुष्ट नहीं दिखते.
    .
    हम चाहे जंगली होते, पौधे होते लेकिन होते आपस मैं प्रेम बांटने वाले. उच्च विचार और मैं सहमत.

    उत्तर देंहटाएं
  9. dr.saheb humen hindi wale fool th,ab angrezi wale fool ban kar rah gaye hain satik likha aapane

    उत्तर देंहटाएं
  10. दादा उत्तम पुरूष कर्मण्येवाधिकारस्ते की तर्ज पर चलता है। आप भी चले चलें कांटे न आये जीवन मे तो मजा भी क्या है। बाकि प्रकृति की तो बात ही क्या है

    उत्तर देंहटाएं
  11. आभासी तो आभासी है,
    जीवन की नदिया प्यासी है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. bahut sundar ..shastri ji..sach kha ..kash suman hote ham ..to chahe khin bhi khilte kantili jhadiyon pe ya kahin aur ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. इन्सानों की बस्ती के होते
    या जंगली होते....
    लेकिन होते तो...
    खुशियाँ बाँटने वाले
    फूल ही.........!

    बढिया लिखा !!

    उत्तर देंहटाएं
  14. जीवन और जगत के सरोकारों व्यापारों से जुडी मेरी तेरी उसकी सबकी बात ,काश हम भी फूल होते ,कुछ कूल होते अपनी ही खाद बन हवा पानी को ठीक रखते .कृपया यहाँ भी कृतार्थ करें .http://veerubhai1947.blogspot.com/
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  15. वन का जीवन मनोहारी लगता है पर चंद रोज चूंकि हम शहरी जीवन के अभ्यस्त जो हो चुके हैं - आय मीन आभासी जीवन के।

    जहाँ तक बात अपने लिखे को पढ़ने की है, जिसे पढ़ना होता है, वही पढ़ता है शास्त्री जी :)))))))))))))))))))))))))))

    उत्तर देंहटाएं
  16. ये पहाड़ पर जाने का बदलाव है क्या?
    जो भी हो सुंदर अभिव्यक्ति है ..

    उत्तर देंहटाएं
  17. यही है ज़िन्दगी की हकीकत्…………कहीं भी जाइये कहीं भी रहिये कहीं कोई अपना नही होता जब साथ रहने वाले अपने नही होते अपने बच्चे अपने नही रहते तो दूसरी दुनिया मे कहाँ किसी से अपने पन की उम्मीद की जा सकती है…………जिस दिन इंसान इस सच्चाई को स्वीकार लेगा उस दिन से उसके जीवन मे समरसता आ जाती है और फिर वो दुखी नही होता…………उसे पता चल जाता है कि यहाँ कोई नही है अपना ये जग जोगी वाला फ़ेरा।

    उत्तर देंहटाएं
  18. उदासीन दुनिया की झलक को सुन्दर शब्दों में बाँधा ..आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  19. भावनाओं को बहुत सजीव चित्रण किया है

    उत्तर देंहटाएं

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