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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

"गीत-...अन्ना जी को ताकत देना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज जरूरत है गांधी जैसे तेवर अपनाने की
 
अन्ना जी को ताकत देना, लोकपाल को लाने की।
आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।

आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
नौनिहाल पादप जीवन की बगिया में मुर्झाये हैं, 
आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।

मँहगाई की चक्की में, निर्धन जन पिसते जाते हैं,
ढोंगी सन्त-महन्त मजे से, चन्दन घिसते जाते हैं,
आज जरूरत रावण से, सीता की लाज बचाने की।
आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।

राम-कृष्ण की मर्यादा का ध्यान हमें धरना है,
काले अंग्रेजों के बल का हमको मर्दन करना है,
आज जरूरत है गांधी जैसे तेवर अपनाने की।
आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. अण्णा आम आदमी की सबसे बड़ी ताक़त है और उसकी ताक़त हैं हम-आप, सुन्दर रचना !

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  2. वाह शास्त्रीजी क्या बात है आपने तो बहुत ही सुंदर अन्नाजी के पक्छ में गीत लिख डाला /आज ऐसे ही जोश दिलानेवाले गीतों की जरुरत है, काले अंग्रेजों से जीतने के लिए / बधाई आपको /

    उत्तर देंहटाएं
  3. सचमुच सर जागृति ही इलाज है...
    सुन्दर आवाहन...
    सादर बधाई....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह वाह वाह दादा अब इसी मोड मे रहना इस आंदोलन को आपकी लेखनी की आवश्यकता है

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह शास्त्रीजी .... क्या बात है ...आपने अन्नाजी के पक्छ में गीत ... आज ऐसे ही गीतों की जरुरत है ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिलकुल सही कहा आपने शास्त्री जी |
    अहिंसक रह कर भी हम सबको अन्ना के साथ मिलके गांधीवादी तरीके से भ्रष्टाचार मिटाना है |
    बहुत सुन्दर और प्रेरणादायी रचना |
    आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरनीय शास्त्री जी,आपकी जोशीली रचना उत्कृष्ट है,आपकी शैली बहुत सुन्दर है.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
    आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।

    bilkul sahi , iske lie anna ka sath dena hi hoga

    vande maatram

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सटीक व् सार्थक प्रस्तुति aaj की prastithiyon me
    BLOG PAHELI NO.1

    उत्तर देंहटाएं
  10. मँहगाई की चक्की में, निर्धन जन पिसते जाते हैं,
    ढोंगी सन्त-महन्त मजे से, चन्दन घिसते जाते हैं,
    आज जरूरत रावण से, सीता की लाज बचाने की।
    आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।
    सुन्दर पंक्तियाँ! सटीक लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  11. aaj zaroorat aapke jaise kavi ke aage aane kee,
    aaj zaroorat aapki tarah ojasvi bhav jagane kee.
    sundar abhivyakti.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आज देश को ऐसे ही लोगों की जरुरत है ...
    प्रेरक और सार्थक सन्देश !
    आभार !

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  13. आज वास्‍तव में गांधी जैसे तेवरों की ही आवश्‍यकता है।

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  14. आदरनीय शास्त्री जी,आपकी जोशीली रचना बहुत सुन्दर है..सार्थक ...धन्यवाद..

    उत्तर देंहटाएं
  15. आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
    नौनिहाल पादप जीवन की बगिया में मुर्झाये हैं,
    आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।
    आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।।
    " जे मारग पैर धरीजै ,शीश दीजै,कान न कीजै"
    ये लडाई मानवता ,की है ,सच्चरिता की है . देश को महफूज रखने की है , आगे बढ़ो हम साथ हैं /

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  16. राजा का क्या है...वो तो भोग-विलास के लिए ही बना है...उस जगाने की ज़रूरत है...जनता जाग गयी तो वो भी भाग खड़ा होगा...

    उत्तर देंहटाएं

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