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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

"प्यार से प्यार आज़मायेंगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
 जो भी आगे कदम बढ़ायेंगे।
फासलों को वही मिटायेंगे।।
 तुम हमें याद करोगे जब भी,
हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।
    यही हसरत तो मुद्दतों से है,
हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे। 
 ज़िन्दगी का यही फ़साना है,
कभी रोयेंगे कभी गायेंगे।
 खामियाँ हैं, नसीहतें भी हैं,
गल्तियों से, सुधार लायेंगे।
 रूप और रंग तो दिखावा है,
प्यार से प्यार आज़मायेंगे।

21 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िन्दगी का यही फ़साना है,
    कभी रोयेंगे कभी गायेंगे ..

    वाह शास्त्री जी ... जावन का सच सहज ही लिख दिया ... गहरा दर्शन इस एक शेर में ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. sateek bat kahi hai aapne ''roop aur rang to mahaj dikhava hai .aabhar .

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुम हमें याद करोगे जब भी,
    हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।

    जी,शास्त्री जी आप याद करने पर उड़कर मेरे ब्लॉग पर आये,बहुत अच्छा लगा.
    .
    पर यह उड़ान आपने मेरी पिछली पोस्ट पर ही की है.नई पोस्ट तो अभी भी आपके शुभ दर्शनों की प्यासी है.

    आपकी यह प्रस्तुति भी शानदार है.

    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. “रूप” और रंग तो दिखावा है,
    प्यार से प्यार आज़मायेंगे।
    खुबसूरत अभिवयक्ति....

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्यार में पंख खुदबखुद लग जाते है
    उम्दा लेखनी आपकी

    उत्तर देंहटाएं
  6. खामियाँ हैं, नसीहतें भी हैं,
    गल्तियों से, सुधार पायेंगे।

    umdaa!

    उत्तर देंहटाएं
  7. आज क्‍या बात है तेवर बदले हुए हैं। लेकिन अच्‍छे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  8. ज़िन्दगी का यही फ़साना है,
    कभी रोयेंगे कभी गायेंगे।

    बड़ी खुबसूरत ग़ज़ल कही है सर...
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  9. प्यार से आजमाने पर सफलता ही मिलती है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. ज़िन्दगी का यही फ़साना है,
    कभी रोयेंगे कभी गायेंगे।एक से बढ़कर एक अशआर लायें हैं हमारे shaashtriji मयंक
    ram ram bhai

    सोमवार, २२ अगस्त २०११
    अन्ना जी की सेहत खतरनाक रुख ले रही है . /
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  11. गल्तियों से, सुधार लायेंगे
    बहुत सही कहा है आपने शास्त्री जी.बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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