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गुरुवार, 25 अगस्त 2011

"प्रीत की डोरी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मै प्यार का हूँ राही और प्यार माँगता हूँ।
मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।
सूनी सी ये डगर हैं,
अनजान सा नगर हैं,
चन्दा से चाँदनी का आधार माँगता हूँ।
मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।
सूरज चमक रहा है,
जग-मग दमक रहा है,
किरणों से रोशनी का संसार माँगता हूँ।
मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।
यह प्रीत की है डोरी,
ममता की मीठी लोरी.
मैं स्नेहसिक्त पावन परिवार माँगता हूँ।
मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।

26 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सूनी सी ये डगर हैं,
    अनजान सा नगर हैं,
    चन्दा से चाँदनी का आधार माँगता हूँ।
    मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।सुन्दर मनोहर भाव का गीत ,प्रीत प्यार दुलार का गीत ,प्रतीकों की डोर से बंधा अद्भुत गीत .बधाई .
    हमारे वक्त की आवाज़ अन्ना ,सरकार का ताबूत बनके रहेगा अन्ना . . -जय अन्ना !जय भारत !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रेम गीत... मन प्रेम से भर गया...

    उत्तर देंहटाएं
  4. जाग उठे हैं खुद्दार,
    काँप उठी है सरकार।
    आयेगा जनलोकपाल,
    बच नहीं पायेंगे मक्कार।जन जन की ये पुकार ,शाष्त्री जी की हुंकार ......जय अन्ना !जय भारत .! हमारे वक्त की आवाज़ अन्ना ,सरकार का ताबूत बनके रहेगा अन्ना . .

    बुधवार, २४ अगस्त २०११
    मुस्लिम समाज में भी है पाप और पुण्य की अवधारणा ./

    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रेम से लबरेज़ कविता

    उत्तर देंहटाएं
  6. श्रीमान जी
    नमस्कार ..बहुत ही सुन्दर और प्यारभरी कविता ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया रचना शास्त्री जी | आभार |

    कृपया मेरी नई रचना देखें |
    सुनो ऐ सरकार !!
    और इस नए ब्लॉग पे भी आयें और फोलो करें |
    काव्य का संसार

    उत्तर देंहटाएं
  8. शुक्रवार --चर्चा मंच :

    चर्चा में खर्चा नहीं, घूमो चर्चा - मंच ||
    रचना प्यारी आपकी, परखें प्यारे पञ्च ||

    उत्तर देंहटाएं
  9. सूनी सी ये डगर हैं,
    अनजान सा नगर हैं,
    चन्दा से चाँदनी का आधार माँगता हूँ।

    बहुत प्यारी रचना है सर...
    सादर बधाइयां/आभार..

    उत्तर देंहटाएं
  10. ... सुन्दर और प्यारभरी कविता .

    उत्तर देंहटाएं
  11. मैं स्नेहसिक्त पावन परिवार माँगता हूँ।
    मंजिल से प्यार का ही उपहार माँगता हूँ।।

    Very impressive lines !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्रीत, प्रेम, ममता, डोर और मंजिल.. बहुत सुन्दर!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. भर दे सभी की गागर
    ऐसा हो प्रेम - सागर
    मैं प्रेम के जलधि में , मंझधार मांगता हूँ.

    कुछ कहने को , कुछ लिखने को प्रेरित करता मनुहारी गीत.

    उत्तर देंहटाएं
  14. स्नेहसिक्त पावन परिवार माँगता हूँ।
    काश यह सोच सब जगह विकसित हो।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर, बहुत सुन्दर, बहुत सुन्दर गीत है..

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपकी रचना में पवित्र प्रेम,स्नेह,प्रीति का बहुत सुन्दर वर्णन है,

    उत्तर देंहटाएं
  17. श्रेष्ठ रचनाओं में से एक ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं

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