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बुधवार, 24 अगस्त 2011

"भ्रष्टाचार का आवरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मुद्रा का निरन्तर प्रकाशन,
बढ़ती हुई मँहगाई।
निर्घनों का स्वेद,
धनवानों की कमाई।
--


वादाखिलाफी है
टूटते हुए अनुबन्ध। 
स्वप्न का हकीकत से,
नहीं है सम्बन्घ।
--
फिर से चलने लगी है,
जनता की नब्ज़।
अब हो रहा है,
शासकों को कब्ज़।
--
अन्ना हजारे,
गांधी का अवतार।
हिल उठी है,
काले अंग्रेजों की सरकार।
--


जाग उठे हैं खुद्दार,
काँप उठी है सरकार।
आयेगा जनलोकपाल,
बच नहीं पायेंगे मक्कार।
--
बाँदल छटेंगे,
उदित होगा भास्कर।
घोटाले घटेंगे,
सुख देगा दिनकर।
--
उपवन में होगी सुवास,
आयेगा नवल प्रभात।
जन-गण की आशाओं पर,
अब न होगा तुषारापात।
--
अब चलता रहेगा,
ऐसे ही जागरण।
छँट जाएगा मेरे देश से,
भ्रष्टाचार का आवरण।

17 टिप्‍पणियां:

  1. आज के वक़्त की आवाज़ ....और सच्चाई भी ......आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी आशा लिए कविता .आपका सपना पूरा हो तो भारत वर्ष के लिए बेहतर रहेगा.बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपका सपना पूरा हो -भ्रष्टाचार का पूर्ण रूप से सफाया हो जाना चाहिए .आभार .
    BHARTIY NARI

    उत्तर देंहटाएं
  4. बाँदल छटेंगे,
    उदित होगा भास्कर।
    घोटाले घटेंगे,
    सुख देगा दिनकर।
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! प्रेरक और सार्थक रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  5. फिर से चलने लगी है,
    जनता की नब्ज़।
    अब हो रहा है,
    शासकों को कब्ज़।

    बढ़िया रचना सर ... भ्रष्टाचार का आवरण हटे यही शुभासा है.. सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  6. अन्ना हजारे,
    गांधी का अवतार।
    हिल उठी है,
    काले अंग्रेजों की सरकार।
    --

    सत्य वचन्…………यही है आज की आवाज़्।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अब चलता रहेगा,
    ऐसे ही जागरण।
    छँट जाएगा मेरे देश से,
    भ्रष्टाचार का आवरण।

    मन में है विश्वास तो
    शुद्ध होगा पर्यावरण
    तप किया है,क्यों ना होगा
    निर्मल हर आचरण.

    प्रेरक अकविता.

    उत्तर देंहटाएं
  8. कमाल है, कमाल है, कमाल है शास्त्री जी !
    आप को जब भी बांचता हूँ ..नव ऊर्जा का संचार होता है
    धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  9. देश के कार्य में अति व्यस्त होने के कारण एक लम्बे अंतराल के बाद आप के ब्लाग पे आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
    वाह बहुत ही सुन्दर प्रेरक रचना !!!!!!
    आपका बहुत बहुत आभार!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. कविता की शुभेच्छाएं पूर्ण हो ...
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  11. सही,सटीक,सामयिक और प्रेरक क्षणिकाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  12. आज सब मिल कर देश को अभिमान दें।

    उत्तर देंहटाएं
  13. वादाखिलाफी है
    टूटते हुए अनुबन्ध।
    स्वप्न का हकीकत से,
    नहीं है सम्बन्घ।
    --
    फिर से चलने लगी है,
    जनता की नब्ज़।
    अब हो रहा है,
    शासकों को कब्ज़।....

    Great expression .

    .

    उत्तर देंहटाएं

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