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मंगलवार, 9 अगस्त 2011

"दो मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

♥ दो मुक्तक ♥
(1)
त्यागी-बलिदानी आज गौण हुए भारत में,
छँठे हुए लोगों ने राज हथियाया है।
भ्रष्टाचार-अनाचार चारों ओर पापाचार,
रामराज का तो हुआ देश से सफाया है।
साधकों के सुर आज मौन हुए भारत में,
हमको नहीं ऐसा प्रजातन्त्र रास आया है।
(2)
चारों और पश्चिमी बयार चली झूम-झूम,
घूम रही सड़कों पे आधीनंगी काया है।
घोटालों में लिप्त हुआ शासन का मेरुडण्ड,
दूध-घी का रखवाला, बिल्लों को बनाया है।
किसको सौपे आज अपने देश की कमान को,
सच्चा सा सपूत कोई नज़र नहीं आया है।

18 टिप्‍पणियां:

  1. आज सच का सटीक प्रस्तुति

    आदरणीय शास्त्री जी पहली बार टाइपिंग की गलती नजर आ रही है?

    उत्तर देंहटाएं
  2. राकेश कौशिक जी!
    ऑनलाइन लिखता हूँ ना
    इसलिए गल्ती से "का" दो बार
    टाइप हो गया था!
    --
    याद दिलाने के लिए आभार!
    अब सुधार कर दिया है!

    उत्तर देंहटाएं
  3. 'दूध-घी का रखवाला, बिल्लों को बनाया है।
    किसको सौपे आज अपने देश की कमान को,
    सच्चा सा सपूत कोई नज़र नहीं आया है।'

    वाह!

    (शास्त्री जी यह टिप्पणी बाक्स पोस्ट के नीचे ही लगा दें यहाँ भी और चर्चा मंच पर भी कभी-कभी पूरा पेज वाला बाक्स खूलने में बड़ी दिक्कत करता है)

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut sahi kaha yesa prjatantra raas nahi aaya hai.bahut uchch koti ke muktak hain.badhaai.

    उत्तर देंहटाएं
  5. भष्ट्राचार का विकेन्द्रीकरण अधिक तेजी से हो गया है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिलकुल सटीक वर्णन किया है आपने .

    उत्तर देंहटाएं
  7. दोनों मुक्तक बहुत अच्छा लगा! सटीक और सार्थक प्रस्तुती!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  9. हर पार्टी ....एक से बढ कर एक है ....सब एक ही थाली के चट्टे- बट्टे है
    ऐसे देश का क्या होगा ....राम ही जाने ?????
    --

    उत्तर देंहटाएं
  10. एक सार्थक गीत.. बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  11. shandar bhav samahit kiye hui rachna,,hardik badhayee,,,,bahut dino se aap mere blog pe nahi aaye hain...aapko sadar amantrit kar raha hoon

    उत्तर देंहटाएं

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