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शनिवार, 27 अगस्त 2011

"उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


जिस उपवन में पढ़े-लिखे हों रोजी को लाचार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

जिनके बंगलों के ऊपर,
निर्लज्ज ध्वजा लहराती,
रैन-दिवस चरणों को जिनके,
निर्धन सुता दबाती,
जिस आँगन में खुलकर होता सत्ता का व्यापार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

मुस्टण्डों को दूध-मखाने,
बालक भूखों मरते,
जोशी, मुल्ला, पीर, नजूमी,
दौलत से घर भरते,
भोग रहे सुख आजादी का, बेईमान मक्कार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

वयोवृद्ध सीधा-सच्चा,
हो जहाँ भूख से मरता,
सत्तामद में चूर वहाँ हो,
शासक काजू चरता,
ऐसे निष्ठुर मन्त्री को, क्यों झेल रही सरकार।
उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें
    वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
    sastri ji

    उत्तर देंहटाएं
  2. वयोवृद्ध सीधा-सच्चा,
    हो जहाँ भूख से मरता,
    सत्तामद में चूर वहाँ हो,
    शासक काजू चरता,
    वह ! सर क्या बात कही है आपने ,आईना दिखाया है , क्या फर्क पड़ता है, मोटी खाल को ,मर चूका है,आँखों का पानी,ह्रदयकी,संवेदना ....... बहुत ही अच्छा लिखा है ,सम्माननीय सृजन..../

    उत्तर देंहटाएं
  3. अरि आज तो बधाई गाओ रंग महल में ,अन्ना जी की आरती गाओ रंग महल में ,जन गण मन की आरती गाओ रंग महल में .

    उत्तर देंहटाएं
  4. ऐसे निष्ठुर मन्त्री को, क्यों झेल रही सरकार।
    उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

    शास्त्री जी!
    निराश न हों, मंत्रियों के होश अब ठिकाने लगने लगे हैं। देर है अंधेर नहीं होने पाएगा।

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut uttam prastuti ab to bhrasht mantriyon ko hataane ka samay bhi aa gaya.shayad ab koi yesa achcha mantri aaye jiski prashansa me yah kalam chale.

    उत्तर देंहटाएं
  6. जिस उपवन में पढ़े-लिखे हों रोजी को लाचार।
    उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

    bilkul sahi kaha

    उत्तर देंहटाएं
  7. जिस उपवन में पढ़े-लिखे हों रोजी को लाचार।
    उस कानन में स्वतन्त्रता का नारा है बेकार।।

    So very true !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  8. शास्त्रीजी, बच्चे का स्वास्थ्य कैसा है? आशा है परेशानी दूर हो गयी होगी। उसे स्नेहाशीष।

    उत्तर देंहटाएं

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