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सोमवार, 29 अगस्त 2011

"वही हमारे मन को भाई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


  आज शाम को मेरे यहाँ मेरे मित्र
डॉ.सिद्धेश्वर सिंह बैठे थे।
चलते-चलते अचानक उन्होंने कह ही दिया कि
शास्त्री जी आपने लगभग हर विषय पर 
कविताएँ लिखीं हैं।
मगर चाय पर अभी तक एक भी कविता नहीं लिखी है।
मैंमे कहा कि अभी बन जाएगी।
.... और चाय पर यह कविता बन ही गई।

 जो विदेश से चलकर आई।
वही हमारे मन को भाई।।

कैसे जुड़ा चाय से नाता,
मैं इसका इतिहास बताता,
शुरू-शुरू में इसकी प्याली,
गोरों ने थी मुफ्त पिलाई।
वही हमारे मन को भाई।।

यह जीवन का अंग बनी अब,
बहुत चाव से पीते हैं सब,
बिना चाय के मेहमानों को,
खातिर नहीं समझ में आई।
वही हमारे मन को भाई।।

बच्चों को नहीं दूध सुहाता,
चाय देख मन खुश हो जाता,
गर्म चाय की चुस्की लेकर,
बीच-बीच में मठरी खाई।
वही हमारे मन को भाई।।

28 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी ये आपके क्या, bachchon के क्या lagbhag सभी भारतीयों के मन भायी है.सुन्दर कविता.बधाई .

    YE BLOG ACHCHHA LAGA

    उत्तर देंहटाएं
  2. चाय के तो आज क्या कहने .आज तो आम हो या खास सभी की पहली पसंद है .और तो और विज्ञापन कम्पनियों की भी देखिये वे तो इसे स्वास्थ्य वर्धक भी बता रहे हैं .आपकी कविता ने तो रात में भी चाय की इच्छा जगा दी.बधाई.

    न छोड़ते हैं साथ कभी सच्चे मददगार

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बढ़िया कविता भाई
    हम सब के मन को है भाई..

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपतो बस कमाल पे कमाल किए जा रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. चाय जितनी ही स्वादिष्ट कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  6. chaay peete peete chaay par likhi yah kavita padhkar swaad duguna ho gaya.really aajkal hum log to chaay ke gulaam ho gaye hain.aapne bahut hi achcha likha hai.

    उत्तर देंहटाएं
  7. ऐसी भाई कि अब भोजन से अधिक प्रधान है चाई .शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  8. चाय पर कविता बनाकर उसकी उपयोगिता और बढ़ा आपने |बहुत अच्छी कविता के लिए बधाई |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपकी चाय उधार रही। बढिया कविता है।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बढ़िया कविता..चाय पर भी कविता बन ही गई... कहते हैं... a lot can happen over a cup of coffee...सो अब काफी पर लिखिए...

    उत्तर देंहटाएं
  11. चाय से लगाव नही ,चाय पर कविता मन की भायी...
    शुभकामनाये शास्त्री जी ,उम्मीद है ,कि आप के साहबजादे अब स्वास्थ्य-लाभ कर रहे होंगे ...
    आशीर्वाद!

    उत्तर देंहटाएं
  12. विविध सुगंधी और जायकेदार चाय गर्म ,चाया,चाय !चाय !एक सात्विक नशा है चाय जो बड़े नशों से बचाती है .सुन्दर मनभावन चाय गीत ,मनमीत सा .बधाई .
    सोमवार, २९ अगस्त २०११
    क्या यही है संसद की सर्वोच्चता ?
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  13. बहुत खूब ! बहूत सुन्दर प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  14. ab to chay pine ka man hone laga hai , itni rochak jankari ke baad, ab to chay pini hi padegi..badhai

    उत्तर देंहटाएं
  15. sahi kaha bachchon ko chay kah kar complan pilana padta hai...
    बच्चों को नहीं दूध सुहाता,
    चाय देख मन खुश हो जाता,
    गर्म चाय की चुस्की लेकर,
    बीच-बीच में मठरी खाई।
    वही हमारे मन को भाई।।

    main to nahin piti chaahy lekin hamare jivan ka ang ban chuki hai chaay. bahut achchha laga padhna, instant chaay.

    उत्तर देंहटाएं
  16. सुन्दर कविता चाय पर,
    बहुत है मेरे मन को भाई।

    उत्तर देंहटाएं
  17. वैसे मौसम भी चाय के संग मठरी खाने का है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  18. वैसे मौसम भी चाय के संग मठरी खाने का है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  19. सर, काफी देर से ब्लॉग पठन कर रहा हूँ...
    आपकी सुन्दर 'चाय' से याद हो आया पी ही लेता हूँ मंगवा कर... :))
    सादर बधाई, आभार....

    उत्तर देंहटाएं

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