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शनिवार, 20 अगस्त 2011

"अब न टिकेगा भ्रष्टाचार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
भ्रष्ट हुए आचार-विचार!
भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार!!
मची हुई है हा-हाकार!
अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!

अन्ना गांधी बनकर आया,
नैतिकता की आँधी लाया,
बच न सकेंगे अब गद्दार!
अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!

जब ली जनता ने अँगड़ाई,
मक्कारों की शामत आई,
दहल गई इनकी सरकार!
अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!

लेकर आशाओं के ख्वाब,
जनता का आया सैलाब,
फिर से दहक उठे अंगार!
अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!

जन-जन का, जनलोकपाल हो,
भ्रष्टतन्त्र के लिए काल हो,
सबको हों समान अधिकार!
अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!

25 टिप्‍पणियां:

  1. "शास्त्री जी! बहुत सुन्दर गीत लिखा है आपने! इतनी सुन्दर रचना आप ही लिख सकते हैं। तभी तो आपको गुरू माना है मैंने!"

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रेरक अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं
  3. भ्रष्टाचार समाप्त हो, सबकी आस बँधी है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लेकर आशाओं के ख्वाब,
    जनता का आया सैलाब,
    फिर से चहक उठे अंगार!
    अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!
    भ्रष्ट्राचार पर करारा प्रहार करती प्रभावशाली रचना!
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. dr.roopchander ji ,sahi kaha aapane, es aandhi ke aage tik hi nahi sakata sir .dhanyawad

    उत्तर देंहटाएं
  6. yahi dua aur ummeed ham bhi karte hain.

    yaha bhi aapka swagat hai.

    http://anamka.blogspot.com/2011/08/blog-post_20.html

    उत्तर देंहटाएं
  7. लाजवाब और सामयिक कविता।
    इस पंक्ति में चहक की जगह दहक पर विचार करके देखें ...
    फिर से चहक उठे अंगार

    उत्तर देंहटाएं
  8. लाजवाब और सामयिक कविता।
    इस पंक्ति में चहक की जगह दहक पर विचार करके देखें ...
    फिर से चहक उठे अंगार

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपके सुन्दर उद्गार आशा का संचार करते हैं.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    भक्ति,शिवलिंग पर अपने सुविचार प्रकट कीजियेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  10. अन्ना हजारे के आंदोलन के पीछे विदेशी हाथ बताना ‘क्रिएट ए विलेन‘ तकनीक का उदाहरण है। इसका पूरा विवरण इस लिंक पर मिलेगा-
    ब्लॉग जगत का नायक बना देती है ‘क्रिएट ए विलेन तकनीक‘ Hindi Blogging Guide (29)

    उत्तर देंहटाएं
  11. जनता आशाओं के सिवाय और कर भी क्‍या सकती है। अच्‍छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  12. ्समसामयिक रचना…………बहुत सुन्दर्।

    उत्तर देंहटाएं
  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    उत्तर देंहटाएं
  14. अन्ना के समर्थन में और हम सबको प्रेरणा देती बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना | धन्यवाद शास्त्री जी |

    मेरी नई रचना जरुर देखें |

    मेरी कविता: उम्मीद

    उत्तर देंहटाएं
  15. जन-जन का, जनलोकपाल हो,
    भ्रष्टतन्त्र के लिए काल हो,
    सबको हों समान अधिकार!
    अब न टिकेगा भ्रष्टाचार!!
    ..yahi to saari trast janta kee hasrat hai..
    bahut badiya samyik prerak prastuti..aabhar!

    उत्तर देंहटाएं
  16. कैंसर से भी खतरनाक इस बीमारी से बचने के "टीके" (वेक्सिन) खोजें हजार हजार(टीके तो बने हुए हैं प्रत्येक व्यक्ति के पास है पर लगाता नही है; सामान्य उदाहरण:- बिजली बिल पटाना है लाईन मे खड़े नही होना है गये चुपके से भीतर:- "बड़े बाबू प्लीज यार ये काम कर देना……बिल मे ही नत्थी है सेवा शुल्क" यदि जन के मन मे यह भाव हट जाय तो वही "टीका" है)……जन जन की हो यही पुकार……अन्नाजी का श्रम जाये न बेकार……बहुत ही प्रेरक रचना…।

    उत्तर देंहटाएं

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