"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 1 अगस्त 2011

"झूला झूलें सावन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें, झूला झूलें सावन में।
मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।।

मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे,
कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में।
मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।।

हरियाली तीजों पर, कैसे लायें चोटी-बिन्दी को,
सूखे मौसम में कैसे, अब सजें-सवाँरे सावन में।
मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।।

आँगन से कट गये नीम,बागों का नाम-निशान मिटा,
रस्सी-डोरी के झूले, अब कहाँ लगायें सावन में।
मेघ-मल्हारों के गाने को, कभी न भूलें सावन में।।
(चित्र गूगल छवि से साभार)

16 टिप्‍पणियां:

  1. आँगन से कट गये नीम,बागों का नाम-निशान मिटा,
    रस्सी-डोरी के झूले, अब कहाँ लगायें सावन में।

    यही तो आपकी खासियत है शास्त्री जी कि बिना किसी नारे के, बिना किसी शोर शराबे के, आप किसी ज्वलंत समस्या को थमा देते हैं, विचार करने के लिए।
    बहुत खूब!

    उत्तर देंहटाएं
  2. shriman ji aapaka blog dekhane ka awasar mila khoob aanad aaya .rochakva samichin rachanaye badhiya lagi namasakar dr,ji

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके गीत उत्सव हैं.. आपके गीत परंपरा है...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत कुछ बदल गया पर वास्तविकता और सुन्दरता कविता में तो बची है...बहुत-बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  5. सावन छा गया है आप के ब्लॉग पर शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  6. आँगन से कट गये नीम,बागों का नाम-निशान मिटा,
    रस्सी-डोरी के झूले, अब कहाँ लगायें सावन में।


    आपने सच कहा है
    लेकिन हमारे आंगन में अब भी दूसरे पेड़ों के साथ एक बड़ा सा दरख्त अंजीर का खड़ा है। बच्चियां उसी में झूला डालकर झूलती हैं और सामने ही बने पुराने मकान में बरामदे में कड़ियों के बीच एक बेलन भी झूले के लिए ही हमारे दादा हुज़ूर का लगवाया हुआ आज भी है।
    आपका गीत सच बयान करता है और आपका लगाया फ़ोटो एक स्वप्निल संसार में ले जाता है।
    हाय , बचपन !
    मासूम बचपन !!
    बड़े होकर हमने खो दिया है ज़्यादा और पाया है कम, बहुत कम !!!

    आप एक ऐसे साहित्यकार हैं जिनका साहित्य न केवल साहित्य के मानकों पर खरा उतरता है बल्कि उसमें समाज के लिए सकारात्मक संदेश भी होता है। आपकी रचनाओं को देखकर साहित्य सृजन के बारीक पहलुओं को भी सहज ही समझा जा सकता है। प्रस्तुत रचना इसी का एक उदाहरण है.


    "ब्लॉगर्स मीट वीकली में सभी ब्लॉगर्स का हार्दिक स्वागत है"

    उत्तर देंहटाएं
  7. बड़ी बुरी परिस्थिती है इस बदलते परिवेश मे आधुनिकता रीति रिवाजो , खेलो को निगलती जा रही है ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत ख़ूबसूरत सावन का गीत! चित्र भी बहुत सुन्दर लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  9. मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे,
    कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन में।
    bhut sundar rachna
    kabhi hamare blog par akar kuch hame bhi sikhye
    vikasgarg23.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  10. Hi I really liked your blog.
    I own a website. Which is a global platform for all the artists, whether they are poets, writers, or painters etc.
    We publish the best Content, under the writers name.
    I really liked the quality of your content. and we would love to publish your content as well. All of your content would be published under your name, so

    that you can get all the credit for the content. For better understanding,
    You can Check the Hindi Corner of our website and the content shared by different writers and poets.

    http://www.catchmypost.com

    and kindly reply on ojaswi_kaushal@catchmypost.com

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails