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सोमवार, 8 अगस्त 2011

"गीत-..पुरवइया गाती है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
बरस रहे हैं रिम-झिम मेघा, पुरवइया गाती है।
आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।।

छम-छम पड़ती बारिश में, हम धोएँ मन के मैल सभी,
सदा प्यार से रहने की, हम सौगन्धें लें आज-अभी,
प्रेम-प्रीत का पानी पीकर, ही हरियाली आती है।
आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।।

धन-दौलत से नहीं कभी भी, प्यार खरीदा जाता है,
जिसमें कोमल भाव भरे हो, पास उन्हीं के आता है,
है अनमोल देन ईश्वर की, यह नैसर्गिक थाती है।
आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।।

फूल और काँटे जीवन भर, संग-संग ही रहते हैं,
आपस में दोनों मिल-जुलकर, अपना सुख-दुख कहते हैं,
इनकी जीवन कथा, प्रेम की सीख हमें सिखलाती है।
आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।।

31 टिप्‍पणियां:

  1. ्यही है ज़िन्दगी का गीत …………प्रेम प्यार की भाषा सबको अपना बनाती है…………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut hi sundar
    bahut sunder aap li lekh
    kavi ki bavanaye
    bahut kub

    उत्तर देंहटाएं
  3. धन-दौलत से नहीं कभी भी, प्यार खरीदा जाता है,
    जिसमें कोमल भाव भरे हो, पास उन्हीं के आता है,

    सुन्दर अभिव्यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. छम-छम पड़ती बारिश में, हम धोएँ मन के मैल सभी,
    सदा प्यार से रहने की, हम सौगन्धें लें आज-अभी,
    प्रेम-प्रीत का पानी पीकर, ही हरियाली आती है।
    आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।।
    मनमोहक पंक्तियाँ! हर एक शब्द दिल को छू गई! बेहद ख़ूबसूरत गीत!

    उत्तर देंहटाएं
  5. पंक्तियाँ दिल को छू गई...ख़ूबसूरत गीत!

    उत्तर देंहटाएं
  6. एकदम प्रकृति की तरह पवित्र यह सुन्दर गीत मन को खुशी और शांति प्रदान करता है और बहुत सुन्दर बाते कहता है...बस सुन्दर ज्ञानमयी बातों की रिम झिम..

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर गीतमय प्रस्तुति....सुंदर प्रकृति का मनोहारी वर्णन..।

    उत्तर देंहटाएं
  8. uttam ati uttam barkha hume bulati hai.bahut achcha laga yeh geet.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सच कहा है आपने दौलत से प्रेम नहीं खरीदा जा सकता है .आभार itni सुन्दर भावभरी रचना हेतु .

    उत्तर देंहटाएं
  10. bilkul aadarniya,

    aao bheegte hain.....warsha me premotsav laate hain.....

    khoobsoorat fuaron se saji rachna.....

    उत्तर देंहटाएं
  11. धन-दौलत से नहीं कभी भी, प्यार खरीदा जाता है,
    जिसमें कोमल भाव भरे हो, पास उन्हीं के आता है,
    है अनमोल देन ईश्वर की, यह नैसर्गिक थाती है।
    बहुत सुन्दर भावों से भरी कविता.और सत्य को भी सुन्दरता से प्रगट करती .आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह शास्त्री जी, सुंदर गीत पढवाया आपने|

    उत्तर देंहटाएं
  13. wah bahut hi sunder bhav liye.barish ke maadhyam se achcha sandesh deti hui sunder post.badhaai aapko.

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुहाने मौसम का बहुत ही
    मधुर गीत है । आभार बावू
    जी !

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत उम्दा, शुभकामनाएं.

    रामराम

    उत्तर देंहटाएं
  16. धन-दौलत से नहीं कभी भी, प्यार खरीदा जाता है,
    जिसमें कोमल भाव भरे हो, पास उन्हीं के आता है,
    बहुत सुंदर भाव हैं शास्त्री जी। मन खुश हुआ!!

    उत्तर देंहटाएं
  17. एक आनन्ददायक गीत के लिये धन्यवाद..

    उत्तर देंहटाएं
  18. हमारे बुलाने से जब आप ब्लॉगर्स मीट में आ गए तो भला बरखा के बुलाने से हम क्यों न जाएंगे ?
    अब एक सवाल हमारा है। जिसे हल करना बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है।
    क्या आप जानते हैं कि कोई आया या नहीं आया लेकिन ब्लॉगर्स मीट वीकली का आयोजन बेहद सफल रहा ?

    उत्तर देंहटाएं
  19. मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
    आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
    पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  20. मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
    आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
    पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  21. आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है

    yahaan to barkhaa aa hee nahee rahee hai!!!

    उत्तर देंहटाएं
  22. धन-दौलत से नहीं कभी भी, प्यार खरीदा जाता है,
    जिसमें कोमल भाव भरे हो, पास उन्हीं के आता है,
    है अनमोल देन ईश्वर की, यह नैसर्गिक थाती है।
    आओ भीगें साथ-साथ हम, बरखा हमें बुलाती है।

    Beautiful and inspiring creation !

    .

    उत्तर देंहटाएं
  23. shandar ...sahi kaha ...aaj aapne to barish me bhigo diya hai ..is baat par mai bhi JOGI " sir se sahemat hu

    उत्तर देंहटाएं

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