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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

‘‘वन्दना के स्वर’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



 
रात-दिन मैं प्राण की वीणा बजाऊँ।
माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।


मैं सुमन बिन गन्ध का हूँ वाटिका में,
किस तरह यह पुष्प मन्दिर में चढ़ाऊँ।
माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।

मैं निबल हूँ आपका ही है सहारा,
थाम लो माँ हाथ मैं अपना बढ़ाऊँ।
माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।

दो मुझे वरदान तुम हे शारदे माँ!
आरती को अर्चना में गुन-गुनाऊँ।
माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।

साधना में मातु तुम विज्ञान भर दो,
विश्व में मैं ज्ञान का दीपक जलाऊँ।
माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।

26 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत ही सुन्दर वंदना…………माँ को नमन्।

    उत्तर देंहटाएं
  2. दो मुझे वरदान तुम हे शारदे माँ!
    आरती को अर्चना में गुन-गुनाऊँ।
    माँ तुम्हारी वन्दना के स्वर सजाऊँ।।
    ..Vidhya kee devi sarswati Maa ki sundar nav vandana padhkar man ko bahut achha laga..
    Maa ke charon ko saadar naman!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बहुत ही सुन्दर वंदना…………माँ को नमन्।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    आपको बहुत-बहुत --
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. भक्ति और श्रद्धा की अनंत गहराई में ले जाती है यह वंदना !
    आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा शनिवार ३-०९-११ को नयी-पुरानी हलचल पर है ...कृपया आयें और अपने विचार दें......

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर और भाव पूर्ण स्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  8. इतनी सुंदर आराधना कि बिना गुनगुनाये पढ़ा ही नहीं जा सकता.

    उत्तर देंहटाएं
  9. गणेश पर्व के पावन वातावरण में माँ शारदा की पावन स्तुति अति भावमयी है.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत भावपूर्ण स्तुति
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर रचना शास्त्री जी,बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपके स्वर में हमने भी सुर मिलाए
    इसको जी भर कर गाए और गुनगुनाए।

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना ! उम्दा प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत अच्छी प्रार्थना की है सर।

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  15. विश्व में ज्ञान का दीपक जलाने की सुंदर भावना को नमन शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं

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