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रविवार, 11 सितंबर 2011

"धूप फिर से आज भू पर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

ढल गई बरसात अब तो, हो गया है साफ अम्बर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

उमस ने सुख-चैन छीना,
हो गया दुश्वार जीना,
आ रहा फिर से पसीना, तन-बदन पर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

हरितिमा होती सुनहरी जा रही.
महक खेतों से सुगन्धित आ रही,
धान के बिरुओं ने पहने आज झूमर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

ढल रहा गर्मी का यौवन जानते सब,
कुछ दिनों में सर्द मौसम आयेगा जब,
फिर निकल आयेंगे स्वेटर और मफलर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

27 टिप्‍पणियां:

  1. दादा कुछ धूप हमारे पास भी भेंजे यहां तो बाढ़ से जीवन अस्तव्यस्त हो रखा है

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रकृति चित्रण..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. नमस्कार शास्त्री जी ... प्रकृति को अनुपम सुंदरता से लिखा है ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  5. हरितिमा होती सुनहरी जा रही.
    महक खेतों से सुगन्धित आ रही,
    धान के बिरुओं ने पहने आज झूमर।
    खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।

    shaandaar likha hai Sir...

    .

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  7. prakarti ke har pahloo par najar rakhti hai aapki kalam.bahut uttam very nice.

    उत्तर देंहटाएं
  8. खिल उठी है चिलचिलाती,
    धूप फिर से आज भू पर।।


    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  9. ढल रहा गर्मी का यौवन जानते सब,
    कुछ दिनों में सर्द मौसम आयेगा जब,
    फिर निकल आयेंगे स्वाटर और मफलर।
    खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर||
    ............बहुत ही खुबसूरत कविता ...............
    श्रीमान जी कब आएगा ऐसा मौसम इंतजार कर रहें है |

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर, बहुत सुन्दर...पुन: पुन: बहुत सुन्दर./

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर प्रकृति चित्रण| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  12. इसी चक्र से जीवन चल रहा है। दुख के बाद ही सुख की कीमत पता चलती है। एकरसता तो ऊब ही पैदा करती है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुन्दर चित्रण और सुन्दर रचना....

    उत्तर देंहटाएं
  14. उत्तराखंड का ये हाल है...तो हम यू पी वालों का क्या होगा...

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर प्रकृति चित्रण..आभार
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  16. हरितिमा होती सुनहरी जा रही.
    महक खेतों से सुगन्धित आ रही,
    धान के बिरुओं ने पहने आज झूमर।

    मौसम के संधि-काल का मन-भावन, बेजोड़ प्रकृति-चित्रण .

    उत्तर देंहटाएं
  17. सटीक चित्रण किया है इस मौसम का।

    उत्तर देंहटाएं
  18. उमस ने सुख-चैन छीना,
    हो गया दुश्वार जीना,
    आ रहा फिर से पसीना, तन-बदन पर।
    खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर।।
    wakai kitna kast jhela tha...chaliye ab suhane din aane wale hain...aap mere blog per kab aane wale hain...sadar pranam ke sath

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सुन्दर प्रकृति चित्रण ...और आज तो आपका ब्लॉग भी मेरे कंप्यूटर पर खुल पाया है ..ये अलग बात है ...लगे १० से १५ मिनट ...

    उत्तर देंहटाएं
  20. सुंदर गीत

    हालांकि अभी तक बारिश ने बेहाल कर रखा है और धूप का इंतजार है .

    उत्तर देंहटाएं
  21. कुदरत की गोदी मे खिलखिलाती धूप :-) प्यारी से भी बहुत ज्यादा

    उत्तर देंहटाएं

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