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रविवार, 4 सितंबर 2011

"आलुओं को कहीं भी सज़ा लीजिए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


लीजिए आज एक हलकी-फुलकी ग़ज़ल पढ़िए!
 
आलुओं को कहीं भी सज़ा लीजिए
शौक से व्यंजनों का मज़ा लीजिए
खाइए कुछ कचौड़ी मगर प्यार से
 
पेट में कुछ जगह तो बचा लीजिए
 
हो टमाटर की चटनी अगर साथ में
टिक्कियाँ और पकौड़े पचा लीजिए
 
चिप्स-पापड़ सुहाते सभी को बहुत
धूम पिकनिक में इनसे मचा लीजिए
रूप तो एक है वस्तुएँ मिन्न हैं
जो बनाना हो वो ही रचा लीजिए

24 टिप्‍पणियां:

  1. Itnee sajeeli thaliya dekhkar kiska man nahi machal jaayega.
    Sunda kachoriyon. .. Oh. .sorry... Gajal ke liye aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  2. आलू के ऊपर बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ
    सचमुच मुंह में पानी आ गया .....

    उत्तर देंहटाएं
  3. “रूप” तो एक है वस्तुएँ मिन्न हैं
    जो बनाना हो वो ही रचा लीजिए
    वह सर क्या बात है ,आलू नहीं तो कुछ नहीं , क्यों की हमारी अर्थ - व्यवस्था यथा महंगाई के मापदंडों में से यह एक है ,......बहुत मजा आया ,कुछ अलग हट कर ...शुक्रिया सर /

    उत्तर देंहटाएं
  4. mere to muh may pani aa gaya
    muje to bahut hu pasan aaloo
    aaloo ka kuch bhi bane hame to bahut hu pasan
    aap ne to kamal kar deye
    us pe bhi likh hi dali
    nice

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  6. आलू तो अपनी कमजोरी है सर। मुह मे मे पानी ला दिया आपकी पोस्ट ने :)

    ------
    कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. itni achchi kavita aur itne sajehue aalu ke vyanjan dekh kar hi muh me paani aa gaya.really laajabaab.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आलू तो राष्ट्रीय सब्जी है बच्चे बूढ़े और जवान सभी करते इसका सम्मान

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपने तो आलू को भी नहीं बक्शा .....उस पर ही ग़ज़ल लिख डाली .............बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  10. सच में, आलू बहुत ही जगह काम आते हैं।

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति शास्त्री जी!!
    सचमुच मुंह में पानी आ गया ...

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  12. अरे वाह! आलू पर भी इतनी सुन्दर कविता! ये आलू तो मेरे फेवरेट हैं...और इनसे बनी सारी डिशेज भी... सचमुच मुँह में पानी आ गया...

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  13. शास्‍त्रीजी काहे ललचा रहे हैं? पहले तो पानीपूरी दिखा दी अब ये सब? कैसी कैसी मुसीबत खड़ी कर रहे हैं आप? हा हा हाह ाहा।

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  14. अब और ब्लग पढ़ना मुश्किल होगा..
    किधर है आलू..कहाँ है आलू..अजी सुनती हो...!तुमने बहुत दिनो से आलू का पराठां नहीं खिलाया..यहां देखो कवि जी आलू पर पूरी गज़ल लिख दिये!

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  15. शास्त्री जी नमस्कार ,
    चाय-कॉफी के साथ-साथ चिप्स !वाह: क्या बात है
    आइए-मेरे पास गज़ल में सुनवाता हूँ ....


    'गज़ल' सुननें को शिरकत करें !

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  16. आपकी यह पोस्ट तो 'एपेटाईजर' की तरह है...
    भूख लग आई...
    सादर....

    उत्तर देंहटाएं
  17. आलू तो मुझे बेहद पसंद है और आपने उसपर बहुत सुन्दर रचना लिखा है! तरह तरह के स्वादिष्ट खाने के साथ लाजवाब प्रस्तुती!

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  18. आपकी तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक इस मेहनत से लिखी गई पोस्ट के लिए हार्दिकं बधाई.

    ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online

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  19. आप तो आशु कवि हैं एक गज़ल लालू पर भी ,
    एक ग़ज़ल कुछ ऐसी हो बिलकुल लालू जैसी हो ,
    मेरा चाहें कुछ भी हो ,उसकी ऐसी तैसी हो ...

    उत्तर देंहटाएं

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