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शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

‘‘मेरी पसन्द-एक चुनिन्दा रचना’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

♥ जरूरी-सूचना ♥
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♥ मेरी पसन्द ♥
मित्रों!  27 जून, 2009 को रचित
अपनी पसन्द की
एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ!
जलने को परवाना आतुर, आशा के दीप जलाओ तो।
कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।।

मधुवन में महक समाई है, कलियों में यौवन सा छाया,
मस्ती में दीवाना होकर, भँवरा उपवन में मँडराया,
मन झूम रहा होकर व्याकुल, तुम पंखुरिया फैलाओ तो।
कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।।

मधुमक्खी भीने-भीने स्वर में, सुन्दर राग सुनाती है,
सुन्दर पंखों वाली तितली भी, आस लगाए आती है,
सूरज की किरणें कहती है, कलियों खुलकर मुस्काओ तो।
कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।।

चाहे मत दो मधु का कणभर, पर आमन्त्रण तो दे दो,
पहचानापन विस्मृत करके, इक मौन-निमन्त्रण तो दे दो,
काली घनघोर घटाओं में, बिजली बन कर आ जाओ तो।
कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह शास्त्री साहब, आनन्दित कर दिया. इसे गाकर पढ़ने में और अच्छा लग रहा है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. कविता के माध्यम से बड़ा ही मधुर रस छलका गये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. चाहे मत दो मधु का कणभर, पर आमन्त्रण तो दे दो,
    पहचानापन विस्मृत करके, इक मौन-निमन्त्रण तो दे दो,
    काली घनघोर घटाओं में, बिजली बन कर आ जाओ तो।
    कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।
    मीठा गीत ,मीठी बातों ,एहसासों ज़ज्बातों का गेय गीत .सभावित गीत सकारात्मक पक्ष का जीवन के .बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत मधुर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. vah
    etne ras hai pagtiyo may
    lag raha hai, kisi ke yah may likha gayi hai
    bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  6. मीठा सा स्‍नेह निमंत्रण। बहुत ही अच्‍छी और दिल को छूनेवाली रचना, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत मधुर प्रस्तुति| धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह सर, बहुत मधुर रचना है...
    सादर बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
  9. शनिवार १७-९-११ को आपकी पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया पधार कर अपने सुविचार ज़रूर दें ...!!आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. मधुमक्खी भीने-भीने स्वर में, सुन्दर राग सुनाती है,
    सुन्दर पंखों वाली तितली भी, आस लगाए आती है,
    सूरज की किरणें कहती है, कलियों खुलकर मुस्काओ तो


    स्नेहिल आमंत्रण.... कोमल भावों से सजी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्यार का अमृत रस छलकाती ये रचना बेहद सुंदर बन पडी है ।

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  12. हुत सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  13. नई पुरानी हलचल से आपकी इस पोस्ट पर आना हुआ.
    बहुत ही सुन्दर मनमोहक प्रस्तुति है आपकी.

    आभार.

    समय निकालकर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  14. चाहे मत दो मधु का कणभर, पर आमन्त्रण तो दे दो,
    पहचानापन विस्मृत करके, इक मौन-निमन्त्रण तो दे दो,
    काली घनघोर घटाओं में, बिजली बन कर आ जाओ तो।
    कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो
    बहुत सुन्दर मनमोहक प्रस्तुति शास्त्री जी.ये पंक्तियाँ तो बहुत ही सुन्दर थीं.

    उत्तर देंहटाएं

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