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गुरुवार, 29 सितंबर 2011

"होठों को फिर भी, सिये जा रहें हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

घुटन और सड़न में जिए जा रहे हैं,
जहर वेदना के पिये जा रहे हैं।

फकत नाम की है यहाँ राष्ट्र-भाषा,
चढ़ी है जुबाँ पर यहाँ आंग्ल-भाषा,
सभी काम इसमें किये जा रहे हैं।

चुनावों में हिन्दी ध्वजा गाड़ते हैं,
संसद में अंग्रेजियत झाड़ते हैं,
ये सन्ताप माँ को दिये जा रहे हैं।

जिह्वा कलम कर विदेशों में जाते,
ये हिन्दी को नीचा हमेशा दिखाते,
ये नौका भँवर में लिए जा रहे हैं।

भारत की जो जान, दिल और जिगर है
सन्तों की वाणी अमर है अजर है,
ये होठों को फिर भी, सिये जा रहें हैं।

17 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी भाषा हिंदी के प्रति गहन वेदना प्रस्तुत करती अच्छी रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. पाठक-गण ही पञ्च हैं, शोभित चर्चा मंच |
    आँख-मूँद के क्यूँ गए, कर भंगुर मन-कंच |
    कर भंगुर मन-कंच, टिप्पणी करते जाओ |
    प्रस्तोता का करम, नरम नुस्खा अपनाओ |
    रविकर न्योता देत, द्वार पर सुनिए ठक-ठक |
    चलिए रचनाकार, लेखकालोचक-पाठक ||

    शुक्रवार

    चर्चा - मंच : 653

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज तो आपने सबके मन की वेदना चित्रित कर दी……………वेदना के साथ आक्रोश भी उतना ही है………बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आदरणीय मयंक जी नमस्कार्। क्या खूब आपने लिखा है जिह्वा कलम कर विदेशों में जाते,
    ये हिन्दी को नीचा हमेशा दिखाते,
    ये नौका भँवर में लिए जा रहे हैं। मयक जी हमारे नेता ही नही अपने को आधुनिक दिखाने वाले लोग भी हिन्दी को पिछ्ड़ो की भाषा मानते हैं। मयंक जी आप वरिष्ठ है बताये की मै अपने ब्लाग को जहां औरो के ब्लाग पर दूसरो की रचनाए दिख्ती है मै खुद को शामिल कैसे करूं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. हिन्‍दी हमारी मातृ-भाषा है और हमें इसपर गर्व है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. काफी खरी खोटी सुना दी आज तो ...बहुत उच्च कोटि की कविता लिखी है बहुत प्रेरणादायक !एक बात तो पक्की है मरते वक़्त हर इंसान की जुबान से मात्रभाषा ही निकलती है चाहे अपने बच्चों को कोनवेंट में पढ़ाने वाले मंत्रियों से पूछ लो !

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहतरीन रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहतरीन रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बेहतरीन रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  10. हिंदी के दर्द को उकेरती रचना।
    सच में दर्द होता है... हिंदी की उपेक्षा को देखकर।
    देश के संसद में.... न्‍यायालयों में ... और तो और हिंदी फिल्‍मों में काम कर हिंदी भाषी लोगों का खाने वाले कलाकार जब इंटरव्‍यू देते हैं तो अंग्रेजी में बात करते हैं...
    शर्म आनी चाहिए......

    उत्तर देंहटाएं
  11. राष्ट्र भाषा हिन्दी के हालात पर हकीकत बयान करती बेहतरीन कविता. आभार. शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं .

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  12. may chennai ke hu magar mere padae sab hindhi matr bhasa se hi huye hai,
    espar muje garv hai, may bahut pyar karathi hu,

    उत्तर देंहटाएं
  13. सर्वप्रथम नवरात्रि पर्व पर माँ आदि शक्ति नव-दुर्गा से सबकी खुशहाली की प्रार्थना करते हुए इस पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई व हार्दिक शुभकामनायें।

    विभाग दर विभाग मना हिंदी पखवाड़ा।
    कर्तव्य की इतिश्री किये जा रहे हैं॥
    सटीक व सुंदर व्यंग्य…

    उत्तर देंहटाएं
  14. सार्थक प्रश्न उठाती है आपकी रचना ... हिंदी के नाम पर अब सिर्फ खाना पूर्ती होती है ...

    उत्तर देंहटाएं

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