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रविवार, 25 सितंबर 2011

"दोहे-वीणा की झंकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
जिसके सिर पर हो सदा, माता का आशीष।
वो ही तो कहलायगा, वाणी का वागीश।१।

लेखन करती मातु हैं, मैं हूँ मात्र निमित्त।
माता अपने दास का, करना पावन चित्त।२।

मुझ पर माता शारदे, करना यह उपकार।
जीवनभर सुनता रहूँ, वीणा की झंकार।३।

जो अधकचरे ज्ञान का, खुल कर करें बखान।
उनका विज्ञ समाज में, होता है अपमान।४।

ज्ञानी-सज्जनवृन्द का, हो आदर-सत्कार।
अभिमानी के सामने, कभी न मानूँ हार।५।

33 टिप्‍पणियां:

  1. लेखन करती मातु हैं, मैं हूँ मात्र निमित्त।
    माता अपने दास का, करना पावन चित्त

    माँ सरस्वती वंदना वंदनीय है शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  2. maa sarasvati ka haath humesha aapke sir par ho.bahut sunder vandana.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 26-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति के लिए मेरी भी बधाई स्वीकार करें ||

    वागीश का अर्थ वृहस्पति, ब्रह्मा या कवि
    अथवा अच्छा बोलनेवाला में से क्या उपयुक्त है ?
    कृपया प्रकाश डालें ||

    क्या वागीश = वागा + ईश
    वागा = लगाम भी लगाया जा सकता है ?
    गुरुदेव कृपया समझाएं ||

    उत्तर देंहटाएं
  5. .....श्री मान जी नमस्कार .....
    माँ सरस्वती की वंदना बहुत ही सुन्दर है जी |

    उत्तर देंहटाएं
  6. ्बहुत सुन्दर प्रार्थना युक्त दोहे…………पसन्द आये।

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रस्तुति स्तुतनीय है, भावों को परनाम |
    मातु शारदे की कृपा, बनी रहे अविराम ||

    उत्तर देंहटाएं
  8. वागीश का अर्थ वृहस्पति, ब्रह्मा या कवि
    अथवा अच्छा बोलनेवाला में से क्या उपयुक्त है ?
    कृपया प्रकाश डालें ||

    क्या वागीश = वागा + ईश
    वागा = लगाम भी लगाया जा सकता है ?
    गुरुदेव कृपया समझाएं ||

    उत्तर देंहटाएं
  9. भाई दिनेश गुप्ता रविकर जी!
    वागीश का अर्थ जिसका वाणी पर अधिकार हो वह भी तो हो सकता है।
    यहाँ इसी भाव को लेकर दोहे की रचना की गई है!

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर भावना का माँ शारदे के चरणों में सुन्दर दोहों में अर्पण ..अति सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  11. माँ सरस्वती की वंदना...को नमन

    उत्तर देंहटाएं
  12. प्रिय श्रेष्ठ माफ़ी चाहते हैं ,समय से संवाद नहीं करने का ,कारन ,अपनी एक ,पुस्तक प्रकाशन सम्बन्धी व्यस्तता / आपके आशीष की कामना..... आगे समुन्नत सृजन के लिए बधाई /

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर पंक्तियाँ...बहुत खुबसुरत प्रेम भाव..शानदार
    रविकर जी! वागीश का मतलब है वाक+ ईश अर्थात सबसे बड़ा वक्ता

    उत्तर देंहटाएं
  14. जिसके सिर पर हो सदा, माता का आशीष।
    वो ही तो कहलाएगा, वाणी का वागीश।१।
    प्रथम पंक्ति-
    जि=१,के=१,सि=१,हो=१,दा=१,मा=१,ता=१,का=१,आ=२,शी=२,=१२
    द्वितीय पंक्ति-
    वो=१,ही=२,तो=१,ला=१,ए=१,गा=१,वा=१,णी=२,का=१,
    वा=१,गी=२,=१४
    सर,मैं मात्राओ को ठीक से गिन नहीं पा रही|थोड़ी सी मदद करने की कृपा करेंगे तो ठीक कर लूँगी|
    अनुस्वार और विसर्ग भी १मात्रा होती होगी|
    मैंने दोहे से सम्बन्धित पोस्ट को देखा|
    मार्गदर्शन देने के लिए हार्दिक धन्यवाद|
    सादर
    ऋता

    उत्तर देंहटाएं
  15. माँ सरस्वती वंदना वंदनीय है शास्त्री जी

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत खुबसुरत प्रेम भाव..मनमोहक रचना।..

    उत्तर देंहटाएं
  17. रहें बढ़ते
    प्रगति पथ पर ,
    पग निरंतर .
    मातु दो वर.
    ... बहुत सुन्दर -भावपूर्ण प्रस्तुति - स्तुति .
    बधाई .

    उत्तर देंहटाएं
  18. वागीश अर्थात वाक् + ईश .
    वाणी का स्वामी .
    प्रखर वक्ता

    उत्तर देंहटाएं
  19. माँ सरस्वती जी को इसीलिए वागेश्वरी कहा गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  20. माँ शारदे को नमन
    सुन्दर दोहे, सर,
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत सुंदर सरस्वती वंदना आभार
    समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है। आपको और आपके सम्पूर्ण परिवार को हम सब कि और से नवरात्र कि हार्दिक शुभकामनायें...
    .http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं

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