"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

" क्षमा न करता कभी ज़माना" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
जीवन एक मुसाफिरखाना
जो आया है, उसको जाना

झूठी काया, झूठी छाया
माया में मत मन भरमाना

सुख के सपने रिश्ते-नाते
बहुत कठिन है इन्हें निभाना

ताकत है तो, सब है अपने
कमजोरी में झिड़की-ताना

आँखों के तारे दुर्दिन में
जान गये हैं आँख दिखाना

इस दुनिया की यही कहानी
कल हो जाता आज पुराना

सुमन सीख देते हैं सबको
आज खिले कल है मुरझाना

रूप न टिकता है यौवन का
क्षमा न करता कभी ज़माना

17 टिप्‍पणियां:

  1. “रूप” न टिकता है यौवन का
    क्षमा न करता कभी ज़माना

    बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति है.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. अगर आपकी उत्तम रचना, चर्चा में आ जाए |

    शुक्रवार का मंच जीत ले, मानस पर छा जाए ||


    तब भी क्या आनन्द बांटने, इधर नहीं आना है ?

    छोटी ख़ुशी मनाने आ, जो शीघ्र बड़ी पाना है ||

    चर्चा-मंच : 646

    http://charchamanch.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह वाह बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुमन सीख देते हैं सबको
    आज खिले कल है मुरझाना

    bahut khub..

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह सर... बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही आपने...
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं
  6. ek ek pankti kaabile taareef hai.bahut sachchai hai in panktiyon me.

    उत्तर देंहटाएं
  7. व्यक्ति और समाज का विशेष सम्बन्ध।

    उत्तर देंहटाएं
  8. आँखों के तारे दुर्दिन में
    जान गये हैं आँख दिखाना

    दो मुहावरों का विलक्षण प्रयोग. जीवन के शाश्वत गीत को नमन.

    उत्तर देंहटाएं
  9. “रूप” न टिकता है यौवन का
    क्षमा न करता कभी ज़माना

    बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति है.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  10. "आँखों के तारे दुर्दिन में
    जान गये हैं आँख दिखाना"

    बहुत बढ़िया रचना शास्त्री जी |

    उत्तर देंहटाएं
  11. har sher mein jivan ki seekh, duniyadari ki baaten, jo jivan bhar saath chalti...

    सुख के सपने रिश्ते-नाते
    बहुत कठिन है इन्हें निभाना

    ताकत है तो, सब है अपने
    कमजोरी में झिड़की-ताना

    behtareen ghazal ke liye daad sweekaaren Roopchandra ji.

    उत्तर देंहटाएं
  12. सही सन्देश देती अच्छी प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. आदरणीय मयंक जी नमस्कार्। बहुत सुन्दर जीवन का सार बताती लाइनें।रूप न टिकता है यौवन का
    क्षमा न करता कभी ज़माना। आप ब्लाग पर आए धन्यवाद शब्द्पुष्टि करण कैसे हटातें है मुझे नही पता आप बरिष्ठ है बताएं मै अभी नयी हूं मार्ग दर्शन दें और ब्लाग में भी रचनाओं से सम्बन्धित कमियां भी बताएं ।ब्लाग पर आते रहें।

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails