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सोमवार, 19 सितंबर 2011

"ग़ज़ल मय पीते रहे" (गुरू सहाय भटनागर "बदनाम")

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 ♥ मय पीते रहे ♥
(गुरू सहाय भटनागर "बदनाम")
हम तुम्हारे वास्ते दुनियॉ में फिर जीते रहे
चाक कर अपना गिरेवॉ रात दिन सीते रहे

हमने तेरी राह देखी मिलने आओगे जरूर
तन्हा तुम्हारी याद में हम दिल को बहलाते रहे

रात का तन्हा सफर काटा था हमने जागकर
फिर सहर होते तेरी यादों को हम खोते रहे

इस जहाँ के ताने जब हम सुनते-सुनते थक गये
हो गये ‘बदनाम’ मय खाने में मय पीते रहे

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. भटनागर साह्ब की गज़ल पढवाने के लिये हार्दिक आभार्………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मय पीकर बदनाम हुए ...उम्दा ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. रात का तन्हा सफर काटा था हमने जागकर
    फिर सहर होते तेरी यादों को हम खोते रहे
    आभार इस प्रस्तुति के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  5. रात का तन्हा सफर काटा था हमने जागकर
    फिर सहर होते तेरी यादों कोहम खोटे रहे... वाहा बहुत खूब...इस प्रस्तुति के आभार

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। धन्यवाद|

    उत्तर देंहटाएं
  7. गुरूसहाय भटनागर बदनाम ji naam badanaam,rachana naamdar.sadhuwad

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस जहाँ के ताने जब हम सुनते-सुनते थक गये
    हो गये ‘बदनाम’ मय खाने में मय पीते रहे
    प्यार में बदनाम होकर ही नाम मिलता हैं...... आभार

    उत्तर देंहटाएं

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