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सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

“घर-आँगन बसन्ती हो गये!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

P,orchard,spring

गुनगुनी सी धूप में, मौसम गुलाबी हो गया!
प्रकृति के नवरूप का, जीवन शराबी हो गया!!

इश्क की दीवानगी पर, रंग होली का चढ़ा!
घाघरे के साथ फैशन, तंग चोली का बढ़ा!!

प्रेमियों के, पार्क में जमघट नजर आने लगे!
मस्त होकर नीम, जामुन, आम बौराने लगे!!

चीड़ के उन्मुक्त पादप, मस्त हो लहरा उठे,
पर्वतों की गोद में, निर्झर तराने गा उठे,

छोड़कर कैलाश भोले, मन्दिरों में आ गये!
बेलपत्रों के शजर, सौन्दर्य अनुपम पा गये!!

तन हुए हैं पल्लवित, मन मुदित और हर्षित हुए!
सुमन की छवि देखकर, षटपद् सभी मोहित हुए!!

मस्त मौसम देखकर, तन-मन बसन्ती हो गये!
आ गया ऋतुराज, घर-आँगन बसन्ती हो गये!!
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

23 टिप्‍पणियां:

  1. सच में.....आ गया ऋतुराज, घर-आँगन बसन्ती हो गये!!

    बहुत सुंदर कविता...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द लिये हुये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. इश्क की दीवानगी पर, रंग होली का चढ़ा!
    घाघरे के साथ फैशन, तंग चोली का बढ़ा!!

    प्रेमियों के, पार्क में जमघट नजर आने लगे!
    मस्त होकर नीम, जामुन, आम बौराने लगे!!
    वाह,वाह , बहुत खूब शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. mausam baasanti ho gaya
    aap jaise kaviya pr apna rng chhod gaya

    उत्तर देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रेमियों के, पार्क में जमघट नजर आने लगे!
    मस्त होकर नीम, जामुन, आम बौराने लगे!!
    ऋतुराज का असर है शास्त्री जी हम और आप क्या कर सकते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  7. वासंती बयार सुरम्य है ।
    आभार..।

    उत्तर देंहटाएं
  8. अद्भुत मुग्ध करने वाली, विस्मयकारी।

    उत्तर देंहटाएं
  9. मस्त है..बसंत है..फागुनी बयार बहे..वाह!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. ऋतु के अनुसार कविता को बहुत खूबसूरत शब्दों से सजाया है....शिवरात्रि और होली की छटा बिखेर दी है....बहुत सुन्दर.

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  11. मस्त कर दिया

    होली के पहले होली हो ली........

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  12. वाह वाह क्या बात है! बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियाँ! इस लाजवाब रचना के लिए बधाई!

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  13. Bahut hi lubhavani rachana ...Aabhar!!
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  14. ek-ek pankti aakarshak ban padee hai Shastri ji.. aur ye jo naya header chitra dala hai uske to kya kahne...

    उत्तर देंहटाएं
  15. शास्त्री जी,

    सदैव की तरह बहुत सुंदर कविता...

    गुनगुनी सी धूप में, मौसम गुलाबी हो गया!
    प्रकृति के नवरूप का, जीवन शराबी हो गया!!

    वाह

    उत्तर देंहटाएं

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