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सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

“बासन्ती अन्दाज सुहाना लगता है!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


मित्रों! 

यह इस ब्लॉग की 
यह 
503 वीं पोस्ट है!  

यह भी याद नही रहा कि “उच्चारण” पर न जाने 

कब और कैसे 500 पोस्ट पूरी हो गयीं!  

क्या करूँ!

लिखने से फुरसत ही नही मिलती!  

“दिल है कि मानता ही नही!”

सबको अपना आज सुहाना लगता है। 
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

उडने को  आकाश पड़ा है,
पुष्पक भी तो पास खड़ा है, 
पंछी को परवाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

राजनीति की सनक चढी है,
लोलुपता की  ललक बढ़ी है,
काँटों का भी ताज सुहाना लगता है। 
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

गेहूँ पर आ गई बालियाँ,
हरे रंग में रंगी डालियाँ,
ऋतुओं में ऋतुराज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

गुञ्जन करना और इठलाना,
भीना-भीना राग सुनाना,
मलयानिल का साज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

तन-मन ने ली है अँगड़ाई,
कञ्चन सी काया गदराई,
होली का आगाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।। 

टेसू दहका अंगारा सा,
आशिक बहका आवारा सा,
बासन्ती अन्दाज सुहाना लगता है।
छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

20 टिप्‍पणियां:

  1. उडने को आकाश पड़ा है,
    पुष्पक भी तो पास खड़ा है,
    पंछी को परवाज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है ..

    वह शास्त्री जी .... बहुत बहुत बधाई ५०० पोस्ट पूरी होने की .... बहुत ही लजवाब रचना के साथ ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सर्वप्रथम आपको 500 वीं पोस्‍ट के लिए बधाई। लेकिन राज कुछ न छिपाएं, ह‍म सबसे। अच्‍छी रचना, बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच है सभी को बसंत सुहाना लगता है . बहुत बढ़िया रचना प्रस्तुति आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  4. उडने को आकाश पड़ा है,
    पुष्पक भी तो पास खड़ा है,
    bahut khubsurat panktiyan

    उत्तर देंहटाएं
  5. मयंक जी,
    बधाई। ईश्वर करे आप इसी तरह बिना थके लिखते रहें और आप को पता भी ना चले कि कब संख्या में एक और शून्य आ जुड़ा।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाकई आपकी लेखन की क्षमता जबरदस्त है. लिखते रहिये आप तो. एक मिंडी और लागाईये फ़िर सीधे ५००३ पर पहुंचेइये. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर!
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  8. पांच सौवीं पोस्ट पूरी करने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई....


    गुञ्जन करना और इठलाना,
    भीना-भीना राग सुनाना,
    मलयानिल का साज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

    बहुत सुंदर पंक्तियों के साथ .... सुंदर कविता....

    उत्तर देंहटाएं
  9. याद न आने का कारण
    आपके द्वारा रचे गए वासंती गीत हैं!
    इन वासंती गीतों की
    मधुर झंकार के साथ आपको
    बहुत-बहुत बधाई!
    अभिनंदन!
    शुभकामनाएँ!

    --
    कह रहीं बालियाँ गेहूँ की - "वसंत फिर आता है - मेरे लिए,
    नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा!"
    --
    संपादक : सरस पायस

    उत्तर देंहटाएं
  10. डबल आनन्द दिया आपने

    गीत का भी और ५०० पोस्ट पूर्ण होने का भी......

    अभिनन्दन !

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपको ५० वी पोस्ट की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें!
    बहुत सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  12. राजनीति की सनक चढी है,
    लोलुपता की ललक बढ़ी है,
    काँटों का भी ताज सुहाना लगता है।
    छिपा हुआ हर राज सुहाना लगता है।।

    बहुत खूब.....अच्छी रचना....बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  13. बेहतरीन रचना.

    ५०० का आंकड़ा पार करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  14. बधाई हो. आप इसी तरह सुन्दर रचनायें हमें पढ़ाते रहें.

    उत्तर देंहटाएं
  15. बधाई हो. आप इसी तरह सुन्दर रचनायें हमें पढ़ाते रहें.

    उत्तर देंहटाएं
  16. ५०० पोस्ट पू्री होने पर बहुत बधाई .....यह रचना भी मनभावन है!!
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  17. abhi to kewal 500 paas kiya hai guru ji....50000 bhi bahut jaldi paar ho jayengi....

    aise he likhte rahiye...

    shubhkaamnaayein!!

    उत्तर देंहटाएं
  18. 500 vi post ki hardik badhayi...........jaldi se 1000 vi post padhne ko mile aap aise hi sundar sundar geet rachte rahein aur hum isi prakar padhte rahein .....yahi kamna hai..........iske sath jo rachna lagayi hai uska to kahna hi kya,,,,aanand aa gaya.

    उत्तर देंहटाएं

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