"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

“मेरी पसन्दः मेरा पुराना गीत” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“गली-गाँव में धूम मची है…..”


गली-गाँव में धूम मची है,


फागों और फुहारों की।।


मन में रंग-तरंग सजी है,


होली के हुलियारों की।।



गेहूँ पर छा गयीं बालियाँ,


नूतन रंग में रंगीं डालियाँ,


गूँज सुनाई देती हमको,


बम-भोले के नारों की।।



पवन बसन्ती मन-भावन है,


मुदित हो रहा सबका मन है,


चहल-पहल फिर से लौटी है,


घर - आँगन, बाजारों की।।




जंगल की चूनर धानी है,


कोयल की मीठी बानी है,


परिवेशों में सुन्दरता है,


दुल्हिन के श्रंगारों की।।




होली लेकर, फागुन आया,


मीठी-हँसी, ठिठोली लाया,


सावन जैसी झड़ी लगी है,


प्रेम-प्रीत, मनुहारों की।।



गली-गाँव में, धूम मची है,


फागों और फुहारों की।।


मन में रंग-तरंग सजी है,


होली के हुलियारों की।।


(चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut hi Sundar geet ...man prfulltit ho gaya!!
    Aabhar
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. मन में रंग-तरंग सजी है,


    होली के हुलियारों की.nice

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस गीत में चित्रात्मकता बहुत है। आपने बिम्बों से ही नहीं सुंदर-सजीव चित्रों से भी इसे सजाया है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. फाल्गुन आया , प्रकृति ने खुद को रंगों से सजाया ,और आपकी रचना ने अबीर के रंग बिखेर दिए.....बहुत सुन्दर गीत..

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन...फागुनी बयार दिख रही है हर तरफ!

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह होली आने से पहले ही होली का गीत। बहुत ही नायाब बन पड़ा है बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. guru ji pranaam....

    aapne yaadein taaza kar dee jab hum apne ghar mein hua karte thay aur dosto ke saath in sabhi tyohaaron ko manaaya karte thay....

    aajkal to rozi roti ke chakkaron mein ghar se bahar rehna padta hai....

    bahut yaad aati hain wo yaadein suhaani...

    उत्तर देंहटाएं
  8. चित्र भी गीत की तरह ही खूबसूरत हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  9. अरे वाह पूरे ब्लॉग पर फागुन छा गया हो जैसे..बहुत सुन्दर.

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 13.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails