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शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

“…..साथी साथ निभाना!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

flying-cranes
चलते-चलते थक मत जाना, साथी साथ निभाना!
बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

सुख आने पर पर मुस्काना है,
दुख से खौफ नही खाना है,
अपने जीवन में समरसता, पग-पग पर अपनाना!
बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

मेहनत से रखना है नाता,
जिससे सब सम्भव हो जाता,
सरिता देती हैं सन्देशा, प्रति-पल चलते जाना!
बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

झूठ नहीं कहता है दर्पण,
कार्य चाहता पूर्ण समर्पण,
कल तो उसका ही होता है, जिसने वर्तमान पहचाना!
बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

जात-धर्म, रंग-रुप न देखो,
आडम्बर उखाड़कर फेंको,
पतझड़ लाता है बसन्त को, दूर भगाकर वीराना!
बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 टिप्‍पणियां:

  1. झूठ नहीं कहता है दर्पण,
    कार्य चाहता पूर्ण समर्पण,
    कल तो उसका ही होता है, जिसने वर्तमान पहचाना!
    बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

    सुंदर , प्रेरणादायी व सार्थक कविता....

    आभार...

    उत्तर देंहटाएं
  2. शास्‍त्री जी, ब्‍लाग पर तो लोग छोटी-छोटी बातों से ही घबराकर भाग रहे हैं। शायद आपकी रचना सभी को प्रेरणा दे दें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जात-धर्म, रंग-रुप न देखो,
    आडम्बर उखाड़कर फेंको,
    पतझड़ लाता है बसन्त को, दूर भगाकर वीराना!
    बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!

    बहुत सुन्दर शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मेहनत से रखना है नाता,
    जिससे सब सम्भव हो जाता,
    सरिता देती हैं सन्देशा, प्रति-पल चलते जाना!
    बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!


    बहुत सार्थक और प्रेरणादायक रचना है....सन्देश से भरपूर

    उत्तर देंहटाएं
  5. झूठ नहीं कहता है दर्पण,
    कार्य चाहता पूर्ण समर्पण,
    कल तो उसका ही होता है, जिसने वर्तमान पहचाना!
    बीच डगर में रुक मत जाना, साथी साथ निभाना!!
    waah ..........bahut hi prernadayi geet...........aabhar.

    उत्तर देंहटाएं
  6. शास्त्री जी सबसे पहले तो मेरी और से जन्मदिन की शुभकामनाये स्वीकार करे. अब मुझे माफ़ करे की मै आपको बधाई देने में लेट हो गया. कर दिया. चलो माफ़ भी कर दिया. शास्त्री जी आपने लिखा था की एक वर्ष कम हो गया तो मै यह कहना चाहूँगा की मेरी जिंदगी में तो कई वर्ष और जुड़ गए. क्योंकि इसी वर्ष में मेरा आप से मिलना हुआ है. दुआ है की आप ऐसे ही लिखते रहे. अच्छे लेखन के लिए बधाई और जन्म दिन की पुन शुभकामनाये
    www.gooftgu.blogspot.com

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  7. सुन्दर संदेश देता हुआ गीत.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर गीत. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  9. चलते-चलते थक मत जाना,
    साथी साथ निभाना!
    बीच डगर में रुक मत जाना..

    कविता की मुखर पंक्तियां ही मन मोह लेती हैं. साधुवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह हर शब्द सच्चाई बयान करती है! बहुत सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  11. साथी हाथ बदाना ......... बहुत सच कहा है शास्त्री जी ......... दिल से लिखा है ... प्रेरणादायी व सार्थक कविता...

    उत्तर देंहटाएं

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