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बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

“…..आई होली रे !” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

holi
आँचल में प्यार लेकर,
भीनी फुहार लेकर.
आई होली, आई होली,
आई होली रे!

चटक रही सेंमल की फलियाँ,
चलती मस्त बयारें।
मटक रही हैं मन की गलियाँ, 
बजते ढोल नगारे।

निर्मल रसधार लेकर,
फूलों के हार लेकर,
आई होली, आई होली,
आई होली रे!

मीठे सुर में बोल रही है,
बागों में कोयलिया।
कानों में रस घोल रही है,
कान्हा की बाँसुरिया।

रंगों की धार लेकर,
सुन्दर शृंगार लेकर, 
आई होली, आई होली,
आई होली रे!

लहराती खेतों में फसलें,
तन-मन है लहराया.
वासन्ती परिधान पहनकर,
खिलता फागुन आया,

महकी मनुहार लेकर,
गुझिया उपहार लेकर,
आई होली, आई होली,
आई होली रे!
  

20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर गीत, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने होली के र्म्ग में अभी से सराबोर कर दिया.
    ताऊ ने मेरी फोटो क्यों छाप रखी है अपने नाम के आगे :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. मयंक जी,
    गीत ने पुरानी यादें, माहौल और वह समय याद दिला दिया जब सब कुछ निश्छल होता था। लगता नहीं कि अब वह सरलता, आपसी प्रेम-प्यार तिरोहित हो मतलबीपने को जगह देता जा रहा हो।

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस बार होली पर पुणे में है देखो वहाँ कैसे मनाते हैं होली? इस बार पुणे में बम विस्‍फोट भी हुआ है तो शायद ही कोई होली मनाए। लेकिन आपका गीत गाकर ही होली मना ली जाएगी।

    उत्तर देंहटाएं
  5. इसे देख मेरा भी अभी रंग मलने का दिल कर रहा है, शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही सुंदर गीत .. आई होली रे !!
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  7. रवि जी!
    मेरे ब्लॉग पर सबसे पहले त्योहार सजते हैं और अन्त तक बने रहते हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  8. आओ यारों. खुशियाँ मनाओ,
    देखो आई है होली,
    रंग , अबीर, गुलाल,
    चारों ओर
    देखो आई है होली...

    खील, बतासे,
    और गुझिया
    हम तो शास्त्री जी के साथ खायेंगे...
    और बनायेंगे रंगोली,
    देखो आई है होली.

    आपकी यह कविता बहुत अच्छी लगी .....

    आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं....

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर होली गीत! बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर, आप ने भुली बिसरी यादे याद दिला दी इन चित्रो के मध्यम से, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  11. निर्मल रसधार लेकर,
    फूलों के हार लेकर,
    आई होली, आई होली,
    आई होली रे ...

    राम राम शास्त्री जी .... होली की बहार दिख रही है ब्लॉग पर आज ....... बहुत लाजवाब रचना है ... मन झूम रहा है ...

    उत्तर देंहटाएं

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