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मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

“लगता है बसन्त आया है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)


हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है! 
लगता है बसन्त आया है!!


नयनों में सज उठे सिन्दूरी सपने से,
कानों में बज उठे साज कुछ अपने से,
पुलकित होकर रोम-रोम मुस्काया है!
लगता है बसन्त आया है!!


खेतों ने परिधान बसन्ती पहना है,
आज धरा ने धारा नूतन गहना है,
आम-नीम पर बौर उमड़ आया है!
लगता है बसन्त आया है!!


पेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं,
वैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है,
होली की रंगोली ने मन भरमाया  है!
लगता है बसन्त आया है!!
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

14 टिप्‍पणियां:

  1. पेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं,
    वैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है.nice

    जवाब देंहटाएं
  2. पेड़ों ने सब पत्र पुराने झाड़ दिये हैं,
    वैर-भाव के वस्त्र सुमन ने फाड़ दिये है,
    होली की रंगोली ने मन भरमाया है!
    लगता है बसन्त आया है!!
    बढ़िया शास्त्री जी !

    जवाब देंहटाएं
  3. मुझे तो कन्फर्म हो चुका है कि आया है.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर लगा आप का यह बसन्‍त गीत.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. Prakrati ka iatana chundar chitran karane me aapki lekhani prakhar hai...bahut sundar basant geet!
    Sadar

    जवाब देंहटाएं

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