"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

"समझो तभी बसन्त!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

“कुछ दोहे”


two-parrots
जैसे-जैसे आ रहा, प्रेम-दिवस नज़दीक।
गोवा और मुम्बई के, लगे चहकने बीच।।

तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।
दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।।

प्रेम दिवस में हो रहा, खेल बहुत संगीन।
शब्द-ज़ाल में फँस गई, नाजुक उम्र हसीन।।

नादानी और भूल से, कभी न करना प्यार।
भली-भाँति सब सोचकर, ही करना इकरार।।

दिल-दिल से मिल जाये जब, समझो तभी बसन्त।
हर मौसम ऋतुराज है, होता आदि न अन्त।।


(चित्र गूगल से साभार)

23 टिप्‍पणियां:

  1. Wah!kya kahane ise kahate hai ek panth do kaaj :)
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. नसीहत भरे दोहे
    वाकई ऋतुराज के आगमन से सही गलत की परख का ह्रास हो जाता है फिर सावधानी जरूरी है.

    उत्तर देंहटाएं
  3. तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।
    दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।।

    वाह! बहुत खूब..... प्रेम दिवस पर सुंदर सन्देश के साथ.....यह रचना बहुत अच्छी लगी....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. हर मौसम ऋतुराज है, होता आदि न अन्त।।


    nice

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर दोहे हैं बधाई। अब तो रंगों का त्यौहार भी आ रहा है....

    उत्तर देंहटाएं
  7. प्रेम भी सन्देश भी ...बहुत सुंदर दोहे हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह....बहुत ज़बरदस्त दोहे....प्रेम कि पींगें बढ़ाने कि अच्छी सीख देते हुए....

    उत्तर देंहटाएं
  9. ek baar rachna mil jaaye padhne ko aapki...

    aanand ki to garanti hai...

    waah waah !

    उत्तर देंहटाएं
  10. लाख टेक की बात ...
    दिल-दिल से मिल जाये जब, समझो तभी बसन्त ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. सुन्दर , जब कोई दो बोल प्यार के कह दे, हमारे लिए तो तभी वसंत होता है शास्त्री जी !

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दरता से प्रेम सन्देश दिया है आपने ख़ूबसूरत दोहे के साथ! इस बेहतरीन पोस्ट के लिए बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  13. waah waah ........kin shabdon mein tarif karoon..........aaj to gabab kar diya har doha prem sandesh bhi de raha hai aur samjha bhi raha.........bahut hi lajawaab dohe.

    उत्तर देंहटाएं
  14. सुन्दर संदेश. आपका जबाव नहीं. धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  15. दिल-दिल से मिल जाये जब, समझो तभी बसन्त।
    हर मौसम ऋतुराज है, होता आदि न अन्त।।


    ईश्वर से प्रार्थना है कि प्रेम को आवश्यक फैशन मानने वाले हर एक को आपकी ये बातें समझ में आयें और याद भी रहें...

    हमेशा कि भांति सार्थक सुन्दर समसामयिक रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  16. सच कहा आपने प्रेम तो शाश्‍वत रहता है जो हमेशा बना रहता है। उसके लिए किसी ॠतु की आवश्‍कता नहीं है।

    उत्तर देंहटाएं
  17. अस्पताल से थकी हुई आई थी। पर आपकी ईस रचना ने मानो सारी थकावट दूर कर दी। वाह भाई क्या कहने ये है ना सारे मर्ज़ की दवाई "हास्य"

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails